Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश में मानसून की एंट्री के बाद से लगातार बारिश का दौर जारी है, जिससे पूरे राज्य में जनजीवन प्रभावित हो गया है। पहाड़ी इलाकों में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं और कई जगहों पर भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की घटनाएं सामने आई हैं। इसके कारण कई प्रमुख मार्गों पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है।
मौसम विभाग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार 1 जुलाई के बाद से प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से कई गुना अधिक बारिश दर्ज की गई है। किन्नौर में 423 प्रतिशत, चंबा में 107 प्रतिशत, कुल्लू में 195 प्रतिशत, शिमला में 117 प्रतिशत और सिरमौर में 143 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके चलते अचानक नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। वहीं लाहौल-स्पीति एकमात्र जिला रहा जहां इस सीजन में मानसून कमजोर रहा और यहां सामान्य से 30 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है।
मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल के कई हिस्सों में आगामी दिनों में मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। शिमला सहित कई जिलों में बादल छाए हुए हैं, हालांकि शनिवार और रविवार को बारिश में कुछ कमी की संभावना जताई गई है।
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इसके बाद 6 और 7 जुलाई के आसपास एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे राज्य में फिर से भारी बारिश हो सकती है। इसी को देखते हुए मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
भारी बारिश के कारण राज्य में अब तक लगभग 49 सड़कें बंद हो चुकी हैं। इसके अलावा 3 ट्रांसफार्मर और 23 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिससे कई क्षेत्रों में बिजली और पानी की समस्या पैदा हो गई है। प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों को नदी-नालों के पास न जाने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा से बचने की सख्त सलाह दी है।
इस बार हिमाचल में मानसून लगभग 5 दिन की देरी से पहुंचा है। जून महीने में सामान्य से 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे पूरे सीजन में बारिश की रफ्तार धीमी रहने की आशंका जताई जा रही है।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के वैज्ञानिक शोभित कटियार के अनुसार, “मानसून अभी सक्रिय है और जुलाई में अलग-अलग सप्ताहों में बारिश की तीव्रता बदलती रहेगी। पहले दो सप्ताह में अच्छी बारिश की संभावना है, जबकि अंतिम सप्ताह में गतिविधियां कमजोर हो सकती हैं।”
विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई से सितंबर तक इस बार बारिश का पैटर्न सामान्य से कमजोर रह सकता है, जो पिछले वर्ष की तुलना में बिल्कुल उलट स्थिति है, जब रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई थी।
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