सरकारी बैठकों पर नई गाइडलाइन, IAS अधिकारियों को परिणाम आधारित काम के निर्देश
सरकारी बैठकों पर नई गाइडलाइन, IAS अधिकारियों को परिणाम आधारित काम के निर्देश

Post by : Himachal Bureau

July 4, 2026 3:48 p.m. 124

सरकारी बैठकों में घंटों तक चलने वाली चर्चाएं, देर से शुरुआत और बिना ठोस नतीजे के समाप्त होने वाली कार्यशैली में अब बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। केंद्र सरकार ने नौकरशाही की कार्य संस्कृति को अधिक प्रभावी और परिणाम आधारित बनाने के उद्देश्य से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों के लिए बैठक संचालन की नई गाइडलाइन जारी की है। इस संबंध में भारत सरकार के कैबिनेट सचिव डॉ. टीवी सोमनाथन ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बैठकों का उद्देश्य केवल चर्चा नहीं बल्कि समयबद्ध और प्रभावी निर्णय होना चाहिए।

हिमाचल सरकार ने सभी IAS अधिकारियों को दिए निर्देश

हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी इस गाइडलाइन को राज्य के सभी IAS अधिकारियों तक पहुंचा दिया है। कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेश में अधिकारियों को इन दिशानिर्देशों का अध्ययन करने और उन्हें अपने दैनिक प्रशासनिक कार्यों में लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (HIPPA) को भी कहा गया है कि वह अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में इन दिशा-निर्देशों को शामिल करे, ताकि भविष्य के प्रशासनिक अधिकारियों में बेहतर नेतृत्व, समय प्रबंधन और निर्णय लेने की क्षमता विकसित हो सके।

अनुभव के साथ कार्यशैली में सुधार भी जरूरी

कैबिनेट सचिव डॉ. टीवी सोमनाथन ने कहा कि प्रशासनिक सेवा में लंबे अनुभव का वास्तविक महत्व तभी है, जब अधिकारी हर वर्ष अपनी कार्यशैली में सुधार करें। केवल पुरानी कार्यप्रणाली पर निर्भर रहने से प्रशासनिक दक्षता प्रभावित होती है। उन्होंने अधिकारियों से आत्ममंथन करने और अपने रोजमर्रा के कामकाज को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की अपील की।

अनावश्यक बैठकों से बचने के निर्देश

नई गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी बैठक से पहले उसका उद्देश्य पूरी तरह तय होना चाहिए। यदि किसी विषय का समाधान ई-मेल, फोन कॉल या अन्य डिजिटल माध्यमों से संभव हो, तो बैठक बुलाने से बचना चाहिए। बैठक आयोजित करने से पहले एजेंडा तय करना, आवश्यक दस्तावेज पहले से साझा करना और प्रतिभागियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय देना अनिवार्य बताया गया है।

इसके अलावा सामान्य परिस्थितियों में बैठकों को 30 से 60 मिनट के भीतर समाप्त करने का प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि समय का बेहतर उपयोग हो और निर्णय प्रक्रिया तेज हो सके।

विरोधी राय को भी मिले महत्व

गाइडलाइन में अधिकारियों को सलाह दी गई है कि बैठकों में केवल सहमति बनाने पर जोर न दें, बल्कि अलग राय रखने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को भी खुलकर अपनी बात रखने का अवसर दें। विशेष रूप से कनिष्ठ अधिकारियों और अधीनस्थ कर्मचारियों के सुझावों को महत्व देने तथा उन्हें निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करने पर बल दिया गया है।

हर फैसले के साथ तय होगी जिम्मेदारी

केंद्र सरकार ने बैठक के बाद तैयार होने वाले मिनट्स (Minutes of Meeting) को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया है। निर्देशों के अनुसार प्रत्येक बैठक के दो से तीन दिन के भीतर मिनट्स जारी किए जाने चाहिए। इनमें स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए कि कौन-सा निर्णय लिया गया, उसे लागू करने की जिम्मेदारी किस अधिकारी को सौंपी गई है और उसे पूरा करने की निर्धारित समयसीमा क्या होगी।

केंद्र सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से सरकारी बैठकों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, अनावश्यक समय की बचत होगी और प्रशासनिक निर्णयों का प्रभाव जमीनी स्तर पर अधिक तेजी से दिखाई देगा।

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