Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होते ही भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने व्यापक तबाही मचानी शुरू कर दी है। राज्य के विभिन्न जिलों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (SEOC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अब तक मौसम संबंधी घटनाओं और सड़क हादसों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि प्रदेश को लगभग 16 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा है।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने आने वाले दिनों में बारिश का दौर और तेज होने की संभावना जताते हुए 5 जुलाई से 12 जुलाई तक प्रदेश के कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
किन्नौर में बाढ़ और मलबे से राष्ट्रीय राजमार्ग बंद
शुक्रवार तड़के करीब चार बजे किन्नौर जिले के चोलिंग क्षेत्र में तेज बारिश के बाद अचानक बाढ़ और भारी मलबा आने से शिमला-रिकांगपिओ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-5) करीब छह घंटे तक बंद रहा। सड़क पर लगभग 30 मीटर तक मलबा जमा हो गया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
इसी दौरान वहां से गुजर रही दो कारें भी मलबे की चपेट में आ गईं, हालांकि दोनों वाहन समय रहते रुक गए और बड़ा हादसा टल गया। वहीं रिब्बा क्षेत्र में आई बाढ़ के कारण रिब्बा-कंडे संपर्क मार्ग भी मलबा आने से बंद हो गया है।
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तीन दिन में 16 करोड़ रुपये का नुकसान
राज्य सरकार के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, मानसून के प्रवेश के बाद सिर्फ तीन दिनों में ही प्रदेश को करीब 16 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। भारी बारिश, बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं से सड़कें, पेयजल योजनाएं, बिजली व्यवस्था और अन्य सरकारी संपत्तियां प्रभावित हुई हैं।
प्रदेश में अब भी 49 सड़कें बंद हैं, जबकि तीन बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हैं। लोक निर्माण विभाग, बिजली बोर्ड और प्रशासन की टीमें सड़कें खोलने तथा आवश्यक सेवाओं को बहाल करने में जुटी हुई हैं।
14 लोगों की गई जान
SEOC की रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून से अब तक मौसम संबंधी घटनाओं में 12 लोगों की मौत हुई है, जबकि खराब मौसम के कारण हुए सड़क हादसों में दो अन्य लोगों की जान गई, जिससे मृतकों की कुल संख्या 14 पहुंच गई है।
लगातार हो रही बारिश के कारण कई क्षेत्रों में सड़क संपर्क, बिजली और पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी से जुटा हुआ है।
सामान्य से 106 प्रतिशत अधिक बारिश
प्रदेश में पिछले तीन दिनों के दौरान 30.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 106 प्रतिशत अधिक है। वहीं किन्नौर जिले में 18.3 मिलीमीटर वर्षा हुई, जो सामान्य से 423 प्रतिशत अधिक रिकॉर्ड की गई।
लाहौल-स्पीति को छोड़कर लगभग सभी जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है।
बीते 24 घंटे में यहां हुई सबसे ज्यादा बारिश
मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों में—
जुब्बड़हट्टी (शिमला) – 44 मिमी
बलद्वाड़ा (मंडी) – 32 मिमी
सराहन – 27 मिमी
बिलासपुर – 26 मिमी
बारिश के साथ कई क्षेत्रों में दिन के तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। भुंतर (कुल्लू) में अधिकतम तापमान 6.2 डिग्री, मनाली में 5.5 डिग्री, मंडी में 5.2 डिग्री तथा केलांग में 4.7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा।
12 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने कहा है कि 5 जुलाई से मानसून और अधिक सक्रिय होगा। इसे देखते हुए प्रदेश के कई जिलों के लिए 12 जुलाई तक ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है।
प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे न जाने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने तथा मौसम विभाग और जिला प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
जून में सामान्य से 36 प्रतिशत कम हुई थी बारिश
दिलचस्प बात यह है कि मानसून शुरू होने से पहले जून महीने में प्रदेश में केवल 64.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी, जो सामान्य से 36 प्रतिशत कम रही। वर्ष 1901 के बाद यह 44वीं सबसे कम जून की वर्षा दर्ज की गई। जून महीने में सबसे अधिक वर्षा मंडी जिले में 115 मिलीमीटर रिकॉर्ड की गई थी।
हालांकि जुलाई की शुरुआत के साथ ही मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और प्रदेश में भारी बारिश, बाढ़ तथा भूस्खलन की घटनाओं में तेजी देखने को मिल रही है। प्रशासन ने लोगों से अगले कुछ दिनों तक विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
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