Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार दस्तक दे दी है। मंगलवार को मानसून प्रदेश के सात जिलों तक पहुंच गया, जिसके बाद कई इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार इस बार मानसून सामान्य समय से कुछ दिन देर से पहुंचा है। आमतौर पर प्रदेश में 25 जून तक मानसून आ जाता है, लेकिन इस बार इसकी एंट्री जुलाई की शुरुआत में हुई। मानसून के पहुंचते ही कई जगहों पर बारिश ने राहत भी दी है और परेशानी भी बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।
किन-किन जिलों में पहुंचा मानसून
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार मानसून ने किन्नौर, कुल्लू, लाहुल-स्पीति, शिमला और मंडी के अधिकतर हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया है। इसके अलावा सिरमौर और कांगड़ा जिले के कुछ क्षेत्रों में भी मानसून पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में पूरे प्रदेश में मानसून सक्रिय होने की संभावना है, जिससे बारिश का दायरा और बढ़ सकता है।
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बारिश शुरू होते ही मंडी में हुआ नुकसान
मानसून की पहली तेज बारिश का असर सबसे ज्यादा मंडी जिले में देखने को मिला। जिले के कई इलाकों में भारी बारिश के कारण टमाटर की फसल को नुकसान पहुंचा है। खेतों में पानी भर जाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। बल्ह क्षेत्र सहित कई स्थानों पर सड़कों और खेतों में जलभराव होने से लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। स्थानीय लोगों को कई जगहों पर काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कई इलाकों में दर्ज हुई अच्छी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार मंडी जिले के गोहर में 55 मिलीमीटर और मंडी शहर में 45.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बिलासपुर के बरठीं में 43 मिलीमीटर और कांगड़ा में 31 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। इन इलाकों में लगातार हो रही बारिश से नदी-नालों का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। यदि बारिश का यह सिलसिला जारी रहा तो कुछ स्थानों पर हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
अगले चार दिन भारी बारिश का Alert
मौसम विभाग ने एक से चार जुलाई तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। विशेष रूप से दो से चार जुलाई के बीच कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। दो जुलाई को ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं तीन जुलाई को ऊना, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। चार जुलाई को भी शिमला सहित कई जिलों में मौसम खराब रहने का अनुमान है।
बारिश के साथ तेज हवाएं भी चलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार कई इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। तेज हवा और बिजली गिरने की घटनाएं बिजली आपूर्ति को प्रभावित कर सकती हैं। साथ ही खेतों में खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है।
भूस्खलन और जलभराव का बढ़ा खतरा
लगातार बारिश को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि बारिश के कारण नदी, नाले और खड्ड उफान पर आ सकते हैं। कई पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, चट्टानें गिरने और सड़कें बंद होने जैसी घटनाएं हो सकती हैं। निचले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति भी बन सकती है, जिससे यातायात और सामान्य जीवन प्रभावित होने की आशंका है।
प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। लोगों को नदी-नालों के पास नहीं जाने, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखने तथा जिला प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को मौसम की जानकारी लेकर ही घर से निकलने को कहा गया है।
बल्ह घाटी में जलभराव से बढ़ी परेशानी
मंडी जिले की बल्ह घाटी में कंसा चौक-कुम्मी मार्ग पर बारिश के बाद भारी जलभराव हो गया। सड़क पर पानी भरने के कारण वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगह वाहनों की रफ्तार धीमी करनी पड़ी और लोगों को सुरक्षित रास्ता तलाशना पड़ा। स्थानीय प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।
मानसून की बारिश का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दिया। प्रदेश के कई हिस्सों में दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। सबसे अधिक गिरावट मंडी में 7.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड की गई, जबकि अन्य जिलों में भी लगभग दो डिग्री तक तापमान कम हुआ। न्यूनतम तापमान में भी तीन से चार डिग्री तक का अंतर देखा गया। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है।
लाहुल जिले में हाल ही में हुई भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं का असर अब भी दिखाई दे रहा है। जाहलमा नाले में आई बाढ़ से एक पुलिया बह गई, जिससे एक बरात और कई पर्यटक बीच रास्ते में फंस गए। स्थिति को देखते हुए सीमा सड़क संगठन (BRO) ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया। लोहे की चादर बिछाकर अस्थायी रास्ता बनाया गया और सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।
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