Author : Rajneesh Kapil Hamirpur
हिमाचल प्रदेश के जल शक्ति विभाग के प्रधान सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने विभाग के सभी सहायक अभियंताओं (एई) के कार्यालयों को अगले दो सप्ताह के भीतर पूर्ण रूप से डिजिटाइज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इससे विभागीय कार्यों में पारदर्शिता, गति और जवाबदेही बढ़ेगी तथा योजनाओं की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।
ये निर्देश पालमपुर स्थित विला केमेलिया होटल में आयोजित 'इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) एवं जल प्रबंधन में आधुनिक तकनीक के उपयोग' विषयक कार्यशाला के दौरान दिए गए। कार्यशाला का उद्देश्य विभाग की कार्यप्रणाली को तकनीक आधारित बनाना और जल प्रबंधन में आधुनिक प्रणालियों को बढ़ावा देना था।
बड़ी योजनाओं का अधिकारी स्वयं करेंगे निरीक्षण
प्रधान सचिव ने निर्देश दिए कि 1 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली योजनाओं का निरीक्षण संबंधित सहायक अभियंता (AE) स्वयं करेंगे, जबकि 5 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं का निरीक्षण अधिशाषी अभियंता (EE) करेंगे। सभी निरीक्षणों की रिपोर्ट नियमित रूप से प्रधान सचिव को भेजनी होगी।
इसके अलावा उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि हर दो माह में एक दिन सभी अधिशाषी अभियंता अपने क्षेत्र के सबसे दूरस्थ गांव का दौरा करेंगे, जहां पेयजल एवं अन्य जल शक्ति योजनाओं का निरीक्षण कर उनकी स्थिति की रिपोर्ट सीधे प्रधान सचिव को भेजी जाएगी।
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विभाग के अधिकांश कार्यालय पहले ही हो चुके हैं डिजिटल
डॉ. अभिषेक जैन ने बताया कि जल शक्ति विभाग के 75 से अधिक अधिशाषी अभियंता कार्यालय, 23 अधीक्षण अभियंता कार्यालय, चार मुख्य अभियंता कार्यालय तथा प्रमुख अभियंता कार्यालय पहले ही डिजिटाइज किए जा चुके हैं। अब सभी सहायक अभियंता कार्यालयों को भी पूरी तरह डिजिटल बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने से फाइलों का निस्तारण तेज होगा, रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और विभागीय कार्यों में पारदर्शिता आएगी।
बरसात से पहले तैयार रहने के निर्देश
प्रधान सचिव ने अधिकारियों को मानसून के दौरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगों को पेयजल की उपलब्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए तथा लंबित परियोजनाओं को दोगुनी गति से पूरा किया जाए ताकि आम जनता को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
IoT और सेंसर तकनीक से होगी रियल-टाइम निगरानी
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. अभिषेक जैन ने कहा कि बढ़ती आबादी, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और सेंसर आधारित तकनीक के माध्यम से पेयजल, सिंचाई और मल निकासी योजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि इन तकनीकों के इस्तेमाल से पानी की बर्बादी और लीकेज पर रोक लगेगी, पानी की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखी जा सकेगी तथा दूरदराज के क्षेत्रों तक समान रूप से जल आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों ने साझा किए तकनीकी सुझाव
कार्यशाला के दौरान विभिन्न तकनीकी विशेषज्ञों ने जल प्रबंधन, सिंचाई और मल निकासी योजनाओं में आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और अन्य प्रतिभागियों के साथ परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें लोगों की शंकाओं का समाधान भी किया गया। अंत में प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में पालमपुर की महापौर राधा सूद, उपमहापौर नीलम मलिक, प्रमुख अभियंता (प्रोजेक्ट) डॉ. धर्मेंद्र गिल, मुख्य अभियंता धर्मशाला जोन दीपक गर्ग, धर्मशाला जोन के सभी अधीक्षण अभियंता, अधिशाषी अभियंता, सहायक अभियंता, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी, पंचायती राज प्रतिनिधि तथा स्वयं सहायता समूहों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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