मृत पेंशनरों के खातों से लाखों रुपये निकालने के आरोप में पूर्व पोस्टमास्टर पर मामला दर्ज
मृत पेंशनरों के खातों से लाखों रुपये निकालने के आरोप में पूर्व पोस्टमास्टर पर मामला दर्ज

Post by : Himachal Bureau

June 6, 2026 12:25 p.m. 124

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के इंदौरा क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि समाज को भी झकझोर कर रख दिया है। आरोप है कि एक पूर्व शाखा डाकपाल ने उन लोगों के नाम पर भी सरकारी धन निकाला, जिनका काफी समय पहले निधन हो चुका था। मामले के सामने आने के बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं और पूरे प्रकरण की गहन जांच शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार इंदौरा तहसील के अंतर्गत आने वाले एक शाखा डाकघर में लंबे समय तक कार्यरत रहे पूर्व पोस्टमास्टर पर मृत सामाजिक सुरक्षा पेंशन लाभार्थियों के खातों से धनराशि निकालने का गंभीर आरोप लगा है। जांच में सामने आया है कि कई बुजुर्गों की मृत्यु के बाद भी उनके खातों को सक्रिय रखा गया और कथित रूप से उनके नाम पर धन निकाला जाता रहा। इस पूरे मामले ने पेंशन घोटाला और सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

प्रारंभिक जांच के अनुसार कथित तौर पर मृत लाभार्थियों के नाम पर दस्तावेज तैयार किए गए और उनके खातों से नियमित रूप से राशि निकाली गई। आरोप है कि मृत व्यक्तियों के हस्ताक्षर अथवा अंगूठे के निशान की नकल कर निकासी संबंधी प्रक्रिया पूरी की गई। बताया जा रहा है कि इस तरीके से लाखों रुपये की धनराशि का दुरुपयोग किया गया। मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार लगभग 19 मृत लाभार्थियों के खातों से रकम निकाले जाने की बात जांच एजेंसियों के संज्ञान में आई है।

इस मामले का खुलासा होने के बाद सीबीआई जांच शुरू की गई और संबंधित अधिकारी पूरे रिकॉर्ड की जांच में जुट गए हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह कथित अनियमितता कितने समय से चल रही थी और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित अभिलेखों की विस्तार से जांच की जा रही है।

मामले में आरोपी के खिलाफ विभिन्न कानूनी धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि सरकारी योजनाओं के तहत जारी की गई राशि का उपयोग किस प्रकार किया गया और उससे किसे लाभ पहुंचा। यह मामला सरकारी धन गबन और वित्तीय अनियमितताओं के सबसे गंभीर मामलों में से एक माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सहायता प्रदान करना होता है। यदि इन योजनाओं में किसी प्रकार की धोखाधड़ी होती है तो इसका सीधा असर गरीब और कमजोर वर्गों पर पड़ता है। इसलिए ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई आवश्यक होती है। इस घटना ने डाकघर घोटाला और सरकारी वित्तीय निगरानी प्रणाली की मजबूती को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जाएगी। यदि जांच के दौरान अन्य तथ्यों का खुलासा होता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। इस बीच स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर चर्चा बनी हुई है और लोग दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि आरोप साबित होते हैं तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह मामला भ्रष्टाचार मामला और वित्तीय अनियमितता से जुड़ी जांचों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी हर स्तर पर निगरानी की जा रही है।

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