Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी हरित पंचायत योजना अब पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समाज के जरूरतमंद वर्गों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनेगी। राज्य सरकार ने इस योजना को और अधिक जनकल्याणकारी बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके तहत सौर ऊर्जा परियोजनाओं से प्राप्त होने वाली आय का एक हिस्सा अनाथ बच्चों और विधवा महिलाओं के कल्याण पर खर्च किया जाएगा। सरकार का मानना है कि विकास तभी सार्थक माना जा सकता है जब उसका लाभ समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों तक भी पहुंचे।
योजना के अंतर्गत प्रदेश की 100 ग्राम पंचायतों में 500 किलोवाट क्षमता की भूमि आधारित सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना, पंचायतों की आय बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास को मजबूत करना है। अब सरकार ने इन परियोजनाओं से होने वाली आय के वितरण के स्वरूप में बदलाव करते हुए सामाजिक कल्याण को भी इसमें शामिल किया है।
नई व्यवस्था के अनुसार परियोजनाओं से प्राप्त कुल आय का 20 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार को मिलेगा, जबकि 20 प्रतिशत राशि परियोजनाओं के संचालन और रखरखाव पर खर्च की जाएगी। इसके अतिरिक्त 10 प्रतिशत हिस्सा संबंधित एजेंसी को दिया जाएगा। वहीं 25 प्रतिशत राशि संबंधित ग्राम पंचायत को विकास कार्यों के लिए उपलब्ध करवाई जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शेष 25 प्रतिशत राशि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को प्रदान की जाएगी, जिसका उपयोग संबंधित पंचायत क्षेत्र के अनाथ बच्चों और विधवा महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा।
प्रदेश सरकार पहले से ही कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के माध्यम से अनाथ बच्चों को शिक्षा, देखभाल और आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इस योजना के तहत पात्र बच्चों को प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे वे अपनी पढ़ाई और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा कर सकें। इसके अलावा जरूरतमंद लाभार्थियों को आवास निर्माण के लिए भूमि और वित्तीय सहायता भी उपलब्ध करवाई जा रही है।
विधवा महिलाओं के लिए भी सरकार विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रम चला रही है। पात्र महिलाओं को घर निर्माण के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है, ताकि वे सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन व्यतीत कर सकें। साथ ही उनकी संतानों को उच्च शिक्षा के लिए भी सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपने भविष्य को बेहतर बना सकें।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार समाज के कमजोर वर्गों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उनका कहना है कि हरित पंचायत योजना के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस पहल से अनाथ बच्चों और विधवा महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तथा उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। यह योजना प्रदेश में समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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