Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों को लेकर दिए गए बयान पर छिड़े विवाद के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनके वक्तव्य का गलत अर्थ निकाला गया है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी जनप्रतिनिधि का अपमान करना नहीं था, बल्कि चुनावी राजनीति की एक वास्तविक स्थिति को सामने रखना था। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, जबकि उनका आशय पूरी तरह अलग था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला परिषद चुनाव और अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष के चुनाव के दौरान सदस्यों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उस समय विभिन्न राजनीतिक दल और समूह इन सदस्यों का समर्थन हासिल करने के लिए प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि मतदान से पहले जनप्रतिनिधियों को विशेष महत्व दिया जाता है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अक्सर उनकी उपेक्षा शुरू हो जाती है। उनके बयान का संदर्भ इसी राजनीतिक व्यवहार से जुड़ा था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि “एक दिन की वैल्यू” कहने का आशय केवल उस राजनीतिक महत्व से था जो मतदान के समय दिखाई देता है। इसका किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि की गरिमा, जिम्मेदारी या योगदान से कोई संबंध नहीं था। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत स्तर पर कार्य करने वाले प्रतिनिधि लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनकी भूमिका विकास कार्यों में बेहद अहम होती है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान विपक्षी दल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पंचायत और जिला परिषद स्तर के चुनावों में किसी भी उम्मीदवार को आधिकारिक रूप से मैदान में नहीं उतारा था। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा को यह बताना चाहिए कि पिछली बार की तुलना में इस बार कितने स्थानों पर उसके समर्थित उम्मीदवार अध्यक्ष पद तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल के चुनाव परिणामों में कई स्थानों पर कांग्रेस विचारधारा से जुड़े उम्मीदवारों को जनता का समर्थन मिला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार ऐसी बातें फैला रही है जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश की 251 जिला परिषद सीटों में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, इसके बावजूद जनता के बीच भ्रम पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और राजनीतिक दलों को उसका सम्मान करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले साढ़े तीन वर्षों में किसी भी जनप्रतिनिधि को राजनीतिक कारणों से हटाने जैसी कार्रवाई नहीं की है। सरकार का उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाना और विकास कार्यों को गति देना है। उन्होंने कहा कि पंचायतों और स्थानीय निकायों को विकास कार्यों के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि वे अपने क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार योजनाएं लागू कर सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में हुए चुनावों में कांग्रेस विचारधारा से जुड़े उम्मीदवारों ने कई स्थानों पर बेहतर प्रदर्शन किया है। बड़ी संख्या में प्रधान और उपप्रधान निर्वाचित हुए हैं, जो स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में योगदान देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का ध्यान हिमाचल राजनीति में स्थिरता बनाए रखने और जनता से किए गए वादों को पूरा करने पर केंद्रित है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उनके बयान को विवाद का रूप देने की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुने गए सभी प्रतिनिधियों का सम्मान किया जाना चाहिए और सरकार सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ मिलकर प्रदेश के विकास के लिए कार्य करती रहेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि जनता तथ्यों को समझती है और किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी से प्रभावित नहीं होगी।
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