Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक विरासत का प्रतीक अंतर्राष्ट्रीय मिंजर मेला इस वर्ष 26 जुलाई से भव्य रूप में शुरू होने जा रहा है। चंबा के ऐतिहासिक चौगान मैदान में आयोजित होने वाले इस प्रतिष्ठित मेले को लेकर जिला प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। प्रदेश ही नहीं बल्कि देश और विदेश से भी बड़ी संख्या में पर्यटकों, श्रद्धालुओं और सांस्कृतिक प्रेमियों के इस मेले में पहुंचने की उम्मीद है। जिला प्रशासन के अनुसार इस वर्ष मेले का शुभारंभ प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता करेंगे। कार्यक्रम को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है ताकि आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
जारी कार्यक्रम के अनुसार राज्यपाल 25 जुलाई की शाम को डलहौजी पहुंचेंगे, जहां उनका स्वागत जिला प्रशासन द्वारा किया जाएगा। इसके बाद वे परिधि गृह में रात्रि विश्राम करेंगे। प्रशासन ने उनके प्रवास को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अगले दिन सुबह राज्यपाल चंबा पहुंचकर धार्मिक परंपरा का पालन करते हुए ऐतिहासिक श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। यहां वे विधि-विधान के साथ मिंजर अर्पित करेंगे, जिसके बाद मेले के औपचारिक शुभारंभ का कार्यक्रम आयोजित होगा। इस आयोजन को मिंजर मेला, चंबा समाचार, हिमाचल प्रदेश, सांस्कृतिक मेला, Minjar Fair से जुड़े प्रमुख आयोजनों में गिना जाता है, क्योंकि यह प्रदेश की लोक संस्कृति, धार्मिक आस्था और पर्यटन को नई पहचान देने वाला महत्वपूर्ण उत्सव है।
मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद राज्यपाल ऐतिहासिक चौगान मैदान पहुंचेंगे, जहां हजारों लोगों की मौजूदगी में अंतर्राष्ट्रीय मिंजर मेले का विधिवत शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी उपस्थित रहेंगे। मेले के उद्घाटन समारोह में पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया जाएगा। साथ ही स्थानीय लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी जाएंगी। आयोजन स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है ताकि मेले की भव्यता और सांस्कृतिक विरासत की झलक साफ दिखाई दे।
मिंजर मेले की सबसे बड़ी विशेषता इसकी रंगारंग सांस्कृतिक संध्याएं होती हैं। इस वर्ष भी प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले कलाकार लोक संस्कृति, संगीत और नृत्य की शानदार प्रस्तुतियां देंगे। 26 जुलाई की शाम राज्यपाल सांस्कृतिक संध्या का भी शुभारंभ करेंगे, जिसके बाद कई दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन जारी रहेगा। इन कार्यक्रमों में स्थानीय लोक कलाकारों के साथ-साथ प्रसिद्ध गायकों और सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसके अलावा मेले में पारंपरिक हस्तशिल्प, स्थानीय व्यंजन, कृषि उत्पाद और विभिन्न विभागों की प्रदर्शनियां भी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का विषय होंगी।
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अंतर्राष्ट्रीय मिंजर मेला केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह चंबा जिले के पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी नई गति देता है। मेले के दौरान होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय बाजार और छोटे कारोबारियों को विशेष लाभ मिलता है। बड़ी संख्या में आने वाले पर्यटक हिमाचल की संस्कृति, लोक परंपराओं और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते हैं। जिला प्रशासन ने बताया कि मेले को सफल बनाने के लिए सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था, यातायात नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल, बिजली और साफ-सफाई जैसी सभी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु और पर्यटक को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। प्रशासन ने लोगों से भी मेले के दौरान व्यवस्था बनाए रखने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है।
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