Post by : Shivani Kumari
शुरुआत एक साधारण परिवार से हुई, 12 सितंबर 1934 को जन्मे शांता कुमार ने अपना राजनीतिक सफर पंच पद से 1963 में शुरू किया। उनकी राजनीतिक यात्रा किसी काल्पनिक कथा से कम नहीं है। 19 वर्ष की उम्र में सत्याग्रह-आंदोलन में भाग लेकर पहली बार जेल गए। 70 वर्षों से अधिक कार्यकाल में वे दो बार हिमाचल के मुख्यमंत्री, केंद्र सरकार में उपभोक्ता मामले व ग्रामीण विकास मंत्री, राज्यसभा-सदस्य, विधायक, और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहे।
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में शांता कुमार की छवि ईमानदारी, राष्ट्रवाद, पारदर्शिता और सेवा-सत्य की रही। 1977 में पहली बार जब कांग्रेस के बाद जनता पार्टी, भाजपा के नेतृत्व में वे मुख्यमंत्री बने तो प्रदेश प्रशासन को भ्रष्टाचार मुक्त, गरीबों-किसानों के लिए कल्याणकारी बनाने की कोशिश की। हिमाचल के जल संकट को दूर करने का श्रेय उन्हें 'पानी वाले मुख्यमंत्री' के नाम से मिला। उनके नेतृत्व में राज्य ने कई सामाजिक-आर्थिक सुधार देखे।
1990 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद, उन्होंने भाजपा और जनता दल के गठबंधन की ऐतिहासिक सरकार में प्रशासनिक कार्यों को नई दिशा दी। प्रदेश के विकास, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, और कृषि-खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों को जन-जन में पहुंचाया।
प्रदेश भाजपा में उनका प्रशासनिक अनुभव पार्टी के लिए अमूल्य रहा है। 2027 के लिए भाजपा का संगठन विकास, युवा शक्ति, महिला नेतृत्व, सामाजिक समरसता और क्षेत्रीय विकास पर रणनीति बना रहा है। जेपी नड्डा, प्रेम कुमार धूमल और राजीव बिंदल के नेतृत्व में संगठनात्मक बैठकों में प्रदेश भाजपा ने दो-तिहाई बहुमत का लक्ष्य निर्धारित किया है। शांता कुमार ने इस बार पालमपुर से चुनाव लड़ने की घोषणा की है—यह उनकी अंतिम राजनीतिक इच्छा है।
कांगड़ा जिले में भाजपा की राजनीतिक स्थिति हमेशा चर्चा का विषय रही है। शांता कुमार का ध्यान वोट बैंक, जातीय समीकरण, महिला और युवा मतदाताओं की उम्मीदों की ओर गया है। उन्होंने हमेशा कहा कि लोकतंत्र सेवा का माध्यम है, सत्ता प्रशासन-सत्य और सुशासन के लिए होनी चाहिए। यही वजह है कि 2027 के चुनाव में वे जीतकर सेवा और समाज-सरोकार को अंतिम बार जीना चाहते हैं।
भाजपा-कांग्रेस का संघर्ष हिमाचल प्रदेश की राजनीति की धुरी रहा है। 1990, 1997, 2012, 2022 के चुनावी आंकड़ों में दोनों पार्टियों का वर्चस्व कभी इधर, कभी उधर रहा है। शांता कुमार के विचार में भाजपा संगठन मजबूती, युवाओं-महिलाओं की भागीदारी, और भ्रष्टाचारमुक्त प्रशासन प्रदेश में विकास, लोकतंत्र, और सामाजिक समन्वय का माध्यम बन सकता है। वर्तमान में प्रदेश के मुद्दे—आर्थिक प्रबंधन, रोजगार, शिक्षा, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण—सब भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में शामिल किए गए हैं।
सरकारी योजनाएं, GST राहत, मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य, पेंशन, महिला सुरक्षा, किसान कल्याण सब भाजपा सरकार की प्राथमिकताएं रहीं हैं। चुनावी माहौल में भाजपा संगठन शक्ति, वरिष्ठ नेतृत्व, सकारात्मक संवाद, और आंतरिक संगठन को सर्वोच्च स्थान दे रही है। शांता कुमार का मानना है कि अनुभवी नेता के रूप में वह प्रदेश में सेवा-सत्य-सामाजिक समरसता की मिशाल कायम करना चाहते हैं।
2027 के चुनाव में भाजपा के चुनावी समीकरण, मीडिया विश्लेषण, ओपिनियन पोल के अनुमान, कार्यकर्ता उत्साह, महिला-युवा शक्ति, वरिष्ठ नेतृत्व, और क्षेत्रीय विकास प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं। स्थानीय अखबार, राष्ट्रीय मीडिया, संगठन के मंच पर उनकी घोषणा ने चुनावी माहौल में उत्साह और विचारधारा को नया बल दिया है।
पारदर्शिता, नीति, सेवा भाव, सुशासन, और सबसे बढ़कर लोकतंत्र की मजबूती यह सब शांता कुमार के चुनावी अभियान का हिस्सा है। उनका व्यक्तिगत जीवन भी सेवा, सत्य, सामाजिक कार्य, और साहित्य सृजन की मिसाल रहा है। वे लेखक, विचारक, और कवि हैं—जनता की समस्याओं को समझना, समाधान देना, और हर मोर्चे पर सत्य के साथ खड़ा रहना उनके व्यक्तित्व का हिस्सा है।
कांगड़ा के चुनावी मैदान में अब सबकी निगाहें पालमपुर पर हैं। कार्यकर्ता, नेता, जनता—सब शांता कुमार के अनुभव, विचार, और अंतिम इच्छा का सम्मान करते हैं। प्रदेश भाजपा संगठन ने आंतरिक समीकरण को साधने के लिए महिला, युवा, किसान, व्यापारिक और शिक्षित वर्ग को खास प्राथमिकता दी है।
भाजपा मौके की ताकत को, प्रदेश के मुद्दों को, और विकास की दिशा को लेकर सकारात्मक बदलाव के लिए तैयार है। संगठन में संवाद, कार्यकर्ता एकता, और स्थानीय नेतृत्व को आगे लाने का संदेश प्रमुख है। चुनावी रणनीति में न सिर्फ जीत, बल्कि सेवा-सत्य-सोहार्द, और सामाजिक समरसता को स्थान दिया गया है।
हिमाचल प्रदेश 2027 चुनाव में भाजपा अपने संगठन, नेतृत्व, सुशासन, सामाजिक समन्वय और सेवा भाव के साथ देश-प्रदेश की लोकतांत्रिक परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। शांता कुमार के चुनावी सफर को जन-जन की प्रेरणा माना जाता है। अंत में, सेवा-सत्य, वरिष्ठ नेतृत्व, संगठन शक्ति, लोकतंत्र, और सामाजिक समरसता का संदेश चुनाव के हर स्तर पर गूंजता रहेगा।
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