Post by : Shivani Kumari
हिमाचल प्रदेश में केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए जीएसटी सुधारों और राहतों के बीच कांग्रेस सरकार पर लगातार आरोप लग रहे हैं कि वह उन राहतों का लाभ जनता तक सही तरीके से नहीं पहुंचा रही है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने इस पर कड़ा बयान देते हुए कहा कि जहां केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आम जनता को जीएसटी में छूट और राहत दे रही है, वहीं हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार इस राहत का फायदा जनता को पहुंचाए बिना अपनी तिजोरी भरने में लगी हुई है। नड्डा ने आरोप लगाया कि प्रदेश में सीमेंट पर जीएसटी दर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे सीमेंट की कीमत करीब 30 रुपये प्रति बोरी कम हुई है, लेकिन कांग्रेस सरकार ने एंटी-डंपिंग ड्यूटी के नाम पर सीमेंट के दामों में बढ़ोतरी कराई, जिससे उपभोक्ताओं को फायदा नहीं पहुंचा।
जेपी नड्डा ने यह भी कहा कि जबकि हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक आपदाओं, जैसे बादल फटने और भूस्खलन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, वहां केंद्र द्वारा दिया गया जीएसटी राहत पैकेज अमल में नहीं आ रहा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने केंद्र की योजना को जनता तक पहुंचाने में लापरवाही बरती है, जिससे आम लोग निराश हैं। नड्डा ने मांग की कि राज्य को प्राप्त हुए जीएसटी राहत पैकेज की पूरी पारदर्शिता हो और इसका लाभ सीधे प्रदेश के छोटे व्यापारियों, उद्योगों तथा आम जनता तक पहुंचे।
भाजपा की ओर से यह भी कहा गया है कि कांग्रेस सरकार ने न केवल जीएसटी राहत को जनता तक नहीं पहुंचाया है बल्कि राज्य में पानी के बिल, बिजली दरों, स्टाम्प ड्यूटी समेत अन्य शुल्कों में लगाए गए वृद्धि ने जनता को आर्थिक बोझ में डाला है। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता राकेश जम्वाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने अधिकांश वस्तुओं पर जीएसटी कमी कर आम जनता को राहत दी है, लेकिन कांग्रेस ने स्थानीय स्तर पर इन लाभों को कमजोर कर दिया है।
साथ ही, मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने भी कहा है कि जीएसटी स्लैब में जारी हालिया बदलावों से उपभोक्ताओं को तो लाभ मिलेगा लेकिन हिमाचल जैसे छोटे राज्यों की वित्तीय स्थिति पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि केंद्र राज्यों को उनकी हिस्सेदारी बढ़ाकर वित्तीय संकट से बचाए। उनसे जुड़े सड़कों के निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर के संदर्भ में भी चिंताएं जताई गई हैं।
वहीं विपक्ष और विशेषज्ञ इस विवाद को हिमाचल प्रदेश में वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही की कमी के रूप में देखते हैं। वे मानते हैं कि जीएसटी के तहत मिले कोटे या राहत को राज्य सरकार के स्तर पर सार्वजनिक कर देना चाहिए, ताकि जनता को स्पष्ट जानकारी प्राप्त हो कि क्या राशि मुख्यमंत्री विकास योजना, रोजगार योजनाओं और राहत नौका सहित अन्य विकास कार्यक्रमों में प्रयोग हुई। इसके अभाव में आम जनता के मन में भ्रांतियां और असंतोष बढ़ रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक इस पर जोर देते हैं कि केंद्रीय और राज्य सरकार के बीच समन्वय बेहद जरूरी है, ताकि वित्तीय राहत योजनाओं का लाभ सीधे और बिना किसी अड़चन के प्रदेशवासियों तक पहुंचे। इसके लिए राज्यों का सक्रिय भागीदारी दिखाना जरूरी होता है। हिमाचल प्रदेश की सरकार को अपनी निवेश नीति, टैक्स कटौतियों, और आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए।
कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश में जीएसटी राहत विषय विवादित हो गया है, जहां बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के आरोपों ने कांग्रेस सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया है। प्रदेश में किसानों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं की चिंता के कारण इस मामले पर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। आगामी महीनों में आर्थिक सुधारों, फीस्कल प्रशासकीय नीतियों और सरकारी वित्तीय योजनाओं के प्रभावों का अध्ययन राज्य की आर्थिक दशा तय करेगा।
यह राजनीतिक एवं प्रशासनिक बहस हिमाचल की जनता की वित्तीय स्थिरता, व्यापारिक वातावरण, और विकास कार्यों के लिए निर्णायक साबित होगी। सरकार द्वारा लाभ वितरण की पारदर्शिता, जीएसटी में राहत के सही क्रियान्वयन, और आर्थिक सुधारों की विश्वसनीयता पर ही प्रदेश की विकास गति निर्भर करती है। आगे हुए बदलाव प्रदेश के आर्थिक भविष्य के लिए मील का पत्थर बन सकते हैं।
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