Post by : Khushi Joshi
पाकिस्तान की धरती एक बार फिर भूकंप के तेज झटकों से कांप उठी। मंगलवार देर रात आए इस भूकंप से खासकर बलूचिस्तान के तटीय इलाकों और कराची सहित आसपास के क्षेत्रों में अफरा-तफरी मच गई। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.2 मापी गई। झटके रात करीब एक बजकर इक्कीस मिनट पर महसूस किए गए, जब अधिकांश लोग गहरी नींद में थे, जिससे लोग डर के मारे घरों से बाहर निकल आए।
भूकंप का केंद्र बलूचिस्तान के सोनमियानी इलाके के पास बताया गया है, जो धरती के नीचे लगभग दस किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। सोनमियानी दक्षिण-पूर्वी बलूचिस्तान का एक तटीय क्षेत्र है और कराची से लगभग अस्सी से नब्बे किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। झटकों का असर कराची और उसके आसपास के इलाकों तक महसूस किया गया, हालांकि शुरुआती रिपोर्टों में किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने बताया कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और अब तक किसी बड़े नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। हालांकि भूकंप के झटकों से लोगों में दहशत का माहौल रहा और कई इलाकों में लोग देर तक खुले स्थानों पर जमा रहे। इससे पहले भी सोमवार को बलूचिस्तान के सिबी शहर और आसपास के क्षेत्रों में हल्के झटके महसूस किए गए थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार बलूचिस्तान और दक्षिणी पाकिस्तान का बड़ा हिस्सा भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। इसका मुख्य कारण यहां की भौगोलिक संरचना है, जहां इंडो-ऑस्ट्रेलियाई टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच लगातार टकराव और दबाव बना रहता है। इसी टेक्टोनिक हलचल के कारण इस इलाके में समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं और बड़े भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है।
पाकिस्तान का इतिहास भी कई विनाशकारी भूकंपों का साक्षी रहा है। वर्ष एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर में उत्तरी क्षेत्रों में आए भूकंप में हजारों लोगों की जान गई थी। इसके बाद दो हज़ार पाँचमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और खैबर पख्तूनख्वा में आया भूकंप देश के सबसे घातक भूकंपों में से एक साबित हुआ, जिसमें भारी जान-माल का नुकसान हुआ। बलूचिस्तान भी दो हज़ार आठ, दो हज़ार तेरह औरदो हज़ार पन्द्रह जैसे वर्षों में आए शक्तिशाली भूकंपों से बुरी तरह प्रभावित हो चुका है।
हालिया भूकंप भले ही मध्यम तीव्रता का रहा हो, लेकिन इसने एक बार फिर पाकिस्तान में भूकंप के खतरे की याद दिला दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता, मजबूत निर्माण और आपदा प्रबंधन की तैयारियां बेहद जरूरी हैं, ताकि भविष्य में किसी बड़े भूकंप की स्थिति में जान-माल का नुकसान कम किया जा सके।
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