Author : Prem Sagar
कुल्लू की सुंदर और शांत वादियों में जब कुदरत ने अपना क्रूर रूप दिखाया और सैंज व बंजार घाटी में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया, तब एक नाम उम्मीद और साहस की मशाल बनकर उभरा—हरिराम चौधरी। इनका नाम आज घाटी के हर निवासी की जुबान पर श्रद्धा के साथ लिया जाता है, जिन्हें लोग 'आपदा का हीरो' के रूप में याद करते हैं।
प्रदेश सरकार ने उनकी निस्वार्थ सेवा और समाज के प्रति समर्पण को देखते हुए 5 फरवरी 2026 को शिमला में राज्य पुरस्कार से सम्मानित करने का निर्णय लिया है। इस अवसर पर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह उन्हें सम्मानित करेंगे।
जब बर्फबारी और भारी बारिश ने सड़कों और रास्तों का नामो-निशान मिटा दिया और प्रशासन की सहायता भी दुर्गम रास्तों के कारण बाधित थी, तब हरिराम चौधरी ने घर पर बैठना स्वीकार नहीं किया। लगभग दो महीनों तक बिना थके और रुके, उन्होंने 20 पंचायतों के 36 से अधिक गाँवों का दौरा किया।
जहां कोई सड़क तक नहीं थी, वहां उनके कदम रास्ता बनाते हुए प्रभावित लोगों तक पहुँचे। वे केवल एक पत्रकार के रूप में नहीं बल्कि बेटे, भाई और समाजसेवी के रूप में हर आंगन में पहुँचे, जहां मातम और पीड़ा फैली हुई थी।
हरिराम चौधरी ने पत्रकारिता को केवल खबरों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने इसे 'सेवा धर्म' बना दिया। उन्होंने केवल कैमरे में घटनाओं को कैद नहीं किया, बल्कि प्रभावित परिवारों के दर्द को बांटने का बीड़ा उठाया। उन्होंने मीडिया के माध्यम से सरकार तक समस्याओं को पहुँचाया और सुनिश्चित किया कि राहत कार्य समय पर हों।
उनकी सक्रियता और संपर्क के कारण समाजसेवी संस्थाओं को जोड़ा गया और बंद रास्तों के बावजूद पैदल और वाहन से प्रभावित क्षेत्रों में राशन, दवा और अन्य आवश्यक सामग्री पहुँचाई गई।
आज जब घाटी धीरे-धीरे अपने सामान्य जीवन की ओर लौट रही है, हरिराम चौधरी के सेवा भाव और निस्वार्थ योगदान की गाथाएँ हर घर में गूंज रही हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि आपदा चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, इंसानी जज्बा और सेवा के सामने उसे हराना संभव नहीं।
हरिराम चौधरी सैंज घाटी के प्रतिष्ठित चौधरी परिवार से हैं। 1977 में जन्मे हरिराम ने छात्र राजनीति और सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज सेवा को अपना जीवन लक्ष्य बनाया। पिछले 24 वर्षों से पत्रकारिता और जनसेवा में सक्रिय रहते हुए उन्होंने हमेशा जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
उनकी पत्नी रोहिणी चौधरी जिला परिषद कुल्लू की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी हैं। परिवार की राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि ने हरिराम के सेवा भाव को और मजबूती दी है।
"मानवता सबसे बड़ा धर्म है" के मंत्र को अपनाने वाले हरिराम चौधरी ने समाजसेवी सरबजीत सिंह बॉबी को अपना आदर्श माना। उनके पदचिन्हों पर चलते हुए हरिराम हर परिस्थिति में समाज के लिए तत्पर रहे।
हरिराम चौधरी केवल एक व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि उन हजारों उम्मीदों का प्रतीक हैं जिन्होंने आपदा की मार झेल रहे लोगों को फिर से जीने की ताकत दी। ऐसे लोग समाज के स्तंभ हैं, जो केवल संवेदना और मानवता के सहारे लोगों के लिए खड़े रहते हैं, बिना किसी स्वार्थ के।
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