हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला, अध्यक्षों और सलाहकारों का कैबिनेट दर्जा खत्म, वेतन में 20% कटौती
हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला, अध्यक्षों और सलाहकारों का कैबिनेट दर्जा खत्म, वेतन में 20% कटौती

Post by : Himachal Bureau

March 18, 2026 11:29 a.m. 1548

हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने राज्य की बिगड़ती वित्तीय स्थिति को देखते हुए एक कड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रदेश की भारी आर्थिक तंगी को कम करने के उद्देश्य से सरकार ने विभिन्न आयोगों, बोर्डों, निगमों और प्रशासनिक निकायों के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और सलाहकारों को दिए गए 'कैबिनेट रैंक' के दर्जे को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, अब राज्य में निर्वाचित कैबिनेट मंत्रियों के अलावा किसी भी अन्य पदाधिकारी को कैबिनेट रैंक की सुविधाएं और प्रोटोकॉल प्राप्त नहीं होंगे।

इस कदम को राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने और अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाने की दिशा में सरकार का एक बड़ा प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है।प्रशासनिक प्रोटोकॉल को सुव्यवस्थित करने के लिए की गई इस समीक्षा के तहत न केवल दर्जा छीना गया है, बल्कि इन अधिकारियों के मासिक वेतन और भत्तों में भी भारी कटौती की गई है। सरकार ने आदेश दिया है कि इन सभी शीर्ष पदों पर तैनात व्यक्तियों के कुल वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा 20 सितंबर 2026 तक स्थगित  रहेगा।

इस निर्णय का सीधा असर सुरक्षा व्यवस्था, सरकारी वाहनों के काफिले, स्टाफ और अन्य भत्तों पर पड़ेगा, जो आमतौर पर कैबिनेट रैंक के साथ जुड़े होते हैं। सभी प्रशासनिक सचिवों को इस आदेश पर अविलंब कार्रवाई करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि सरकारी खजाने पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को तुरंत कम किया जा सके।यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब हिमाचल प्रदेश पर कर्ज का बोझ बढ़कर 14 लाख करोड़ रुपये के पार पहुँच गया है और 16वें वित्त आयोग ने वर्ष 2026-31 के लिए राजस्व घाटा अनुदान  पर रोक लगा दी है।

21 मार्च को पेश होने वाले आगामी बजट से ठीक पहले लिया गया यह निर्णय संकेत देता है कि सरकार आने वाले दिनों में और भी सख्त वित्तीय उपाय लागू कर सकती है। हालांकि, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि भले ही राज्य गंभीर आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों के बजट में कोई कटौती नहीं की जाएगी। सरकार का प्राथमिक लक्ष्य दूर-दराज के इलाकों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना है, जिसके लिए संसाधनों का उचित प्रबंधन अनिवार्य हो गया है।

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