मुख्य न्यायाधीश ने मुख्यमंत्री की उपस्थिति में मंडी में नए न्यायालय भवन की शुरुआत की
मुख्य न्यायाधीश ने मुख्यमंत्री की उपस्थिति में मंडी में नए न्यायालय भवन की शुरुआत की

Post by : Himachal Bureau

March 16, 2026 11:44 a.m. 2719

भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की उपस्थिति में मंडी में बनने वाले नए न्यायालय परिसर की आधारशिला रखी। यह परिसर 152 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। यह भवन 9.6 हेक्टेयर भूमि पर बनेगा और इसमें चार ब्लॉक होंगे। इसमें न्यायाधीशों, वकीलों और आम लोगों के लिए आधुनिक सुविधाएँ होंगी।

इस मौके पर एक विधिक साक्षरता शिविर को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायालयों को अस्पतालों की तरह काम करना चाहिए। जैसे लोग अस्पताल में उम्मीद लेकर जाते हैं, वैसे ही लोग न्यायालय से न्याय और मदद की उम्मीद रखते हैं। इसलिए न्याय व्यवस्था को सेवा भाव से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुविधाएँ बढ़ने के साथ न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी भी बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि मंडी को छोटी काशी कहा जाता है, जहाँ बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं। अब यहाँ न्याय का नया भवन बन रहा है, जो जल्द पूरा होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभी लोग अपने मौलिक अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन संविधान में मौलिक कर्तव्य भी हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। लोगों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों दोनों के बारे में जागरूक होना चाहिए।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मुख्य न्यायाधीश का स्वागत किया और राज्य में पुनः आने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक को न्याय और अधिकार आसानी से मिलें। सरकार संविधान की भावना के अनुसार समावेशी विकास और सामाजिक न्याय के लिए काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और पारदर्शी प्रशासन के माध्यम से सभी को समान अवसर देने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार ने लगभग 6,000 अनाथ बच्चों को “राज्य के बच्चे” के रूप में गोद लिया है और इसके लिए देश का पहला विशेष कानून बनाया है। लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र 21 वर्ष कर दी गई है ताकि उन्हें समान अवसर मिलें। बेटियों को पैतृक संपत्ति में 150 बीघा तक समान अधिकार दिया गया है। विधवा महिलाओं के बच्चों की पढ़ाई के लिए इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना शुरू की गई है। राजस्व लोक अदालतों से लगभग 55 लाख पुराने मामलों का निपटारा किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान देश के मूल आदर्शों और मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर के योगदान को याद किया और कहा कि अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन भी जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि हिमाचल प्रदेश को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान बंद होना राज्य के लिए चुनौती है, जो संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत दिया जाता था।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया ने कहा कि न्याय को हर व्यक्ति तक पहुँचाना सभी का साझा प्रयास है। न्याय केवल अदालत तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी जानकारी और समय पर सहायता भी जरूरी है। अन्य न्यायाधीशों ने भी कार्यक्रम में विचार रखे और नए न्यायालय परिसर को लंबे समय से चली आ रही मांग बताया।

इस अवसर पर कई न्यायाधीश, सरकारी अधिकारी, राजनीतिक प्रतिनिधि, बार एसोसिएशन के सदस्य और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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