भाजपा और कांग्रेस के बीच रोमांचक राज्यसभा चुनाव, कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध की नजदीकी जीत
भाजपा और कांग्रेस के बीच रोमांचक राज्यसभा चुनाव, कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध की नजदीकी जीत

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

March 17, 2026 11:51 a.m. 466

हरियाणा में हाल ही में सम्पन्न राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस बाल-बाल बची। यह चुनाव भाजपा और कांग्रेस के लिए बेहद रोमांचक और विवादास्पद रहा। कुल 90 विधायकों में से दो ने मतदान नहीं किया, जबकि 88 ने वोट डाले। इनमें से पांच वोट रद्द हो गए, जिनमें चार कांग्रेस के विधायकों के थे। ऐसे में कुल 83 वैध वोट पड़े, जिनके आधार पर नतीजे तय हुए।

इस चुनाव में भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए। मतदान के दौरान भाजपा के 47 वैध वोटों में से 39 वोट भाटिया को और 8 वोट निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को पड़े। वहीं कांग्रेस के 33 वैध वोटों में से 28 वोट कर्मवीर बौद्ध के पक्ष में आए, जबकि पांच वोट नांदल के पक्ष में क्रॉस वोटिंग के रूप में गए।

इस चुनाव में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा रोमांचक पल तब आया जब कुछ कांग्रेसी विधायकों ने भाजपा के निर्दलीय उम्मीदवार नांदल के पक्ष में वोट डाला। यदि भाजपा का एक वोट रद्द नहीं होता या कांग्रेस का एक और विधायक क्रॉस वोट डाल देता, तो कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध हार जाते। इस तरह यह चुनाव बेहद नजदीकी और रोमांचक साबित हुआ।

कुल 90 में से दो विधायकों ने वोट नहीं डाला। 88 में से पांच वोट रद्द हो गए, जिनमें चार कांग्रेस के विधायक शामिल थे। भाजपा के 47 वैध वोटों में से 39 भाटिया को मिले और 8 नांदल को। कांग्रेस के 33 वैध वोटों में से 28 बौद्ध के पक्ष में और 5 नांदल के पक्ष में गए। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि चुनाव परिणाम पर क्रॉस वोटिंग और रद्द वोटों का निर्णायक प्रभाव पड़ा।

विशेषज्ञों के अनुसार यह चुनाव कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए सीखने वाला रहा। कांग्रेस की जीत न केवल नजदीकी थी, बल्कि इसमें पार्टी की आंतरिक असंतोष और विधायकों की स्वतंत्र निर्णय क्षमता भी सामने आई। भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवार नांदल के लिए क्रॉस वोटिंग ने परिणाम को रोमांचक बना दिया।

राज्यसभा चुनाव के इस परिणाम से हरियाणा की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। कांग्रेस को यह नजदीकी जीत चेतावनी भी दे रही है कि पार्टी को अपने संगठनात्मक ढांचे और विधायकों के समन्वय पर ध्यान देना होगा। वहीं भाजपा और निर्दलीय नेताओं के लिए यह संकेत है कि भविष्य के चुनाव में रणनीति और वोटर प्रभावित करने की क्षमता निर्णायक होगी।

इस तरह हरियाणा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत बाल-बाल हुई, जबकि क्रॉस वोटिंग और रद्द वोटों ने चुनाव के रोमांच और नतीजे को पूरी तरह प्रभावित किया।

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