हिमाचल में कुदरत का कहर, भारी बर्फबारी और बारिश का ऑरेंज अलर्ट
हिमाचल में कुदरत का कहर, भारी बर्फबारी और बारिश का ऑरेंज अलर्ट

Post by : Himachal Bureau

March 18, 2026 11:02 a.m. 2139

हिमाचल प्रदेश में आज, 18 मार्च 2026, को मौसम ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण राज्य के ऊपरी इलाकों में भारी बर्फबारी और निचले इलाकों में मूसलाधार बारिश के साथ ओलावृष्टि का दौर जारी है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने प्रदेश के मध्य और उच्च पर्वतीय जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों को बेहद सतर्क रहने की हिदायत दी है।

बर्फबारी और बारिश का तांडव

लाहौल-स्पीति, किन्नौर और कुल्लू की ऊंची चोटियों पर पिछले 24 घंटों से रुक-रुक कर हिमपात हो रहा है। रोहतांग दर्रा, अटल टनल और जलोड़ी जोत जैसे मुख्य मार्गों पर बर्फ की मोटी चादर बिछने के कारण यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है। वहीं, राजधानी शिमला, मनाली और डलहौजी जैसे पर्यटन स्थलों पर भी बारिश और हल्के हिमपात के कारण पारा शून्य के करीब पहुँच गया है। मैदानी इलाकों जैसे कांगड़ा, हमीरपुर और ऊना में तेज गर्जना के साथ हो रही बारिश और ओलावृष्टि ने तापमान में 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट ला दी है, जिससे मार्च के महीने में दिसंबर जैसी ठंड का अहसास हो रहा है।

किसानों और बागवानों की बढ़ी चिंता

बेमौसम की इस ओलावृष्टि ने राज्य के बागवानों की नींद उड़ा दी है। सेब के क्षेत्रों में इस समय फ्लावरिंग का समय शुरू होने वाला है, ऐसे में ओले और अत्यधिक ठंड फसल को भारी नुकसान पहुँचा सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में जल निकासी की व्यवस्था सही रखें और फिलहाल किसी भी प्रकार के कीटनाशक का छिड़काव न करें। प्रशासन ने बागवानों को अभी 'एंटी-हेल नेट' लगाने से बचने को कहा है, क्योंकि बर्फ के भारी बोझ से नेट और पौधों के टूटने का डर बना हुआ है।

पर्यटकों के लिए सख्त एडवाइज

प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। भूस्खलन  और हिमस्खलन  की आशंका को देखते हुए नदी-नालों के पास जाने और बर्फबारी वाले क्षेत्रों में ट्रेकिंग करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। कई जगहों पर बिजली की लाइनें टूटने और सड़कों पर फिसलन होने के कारण संपर्क मार्ग बाधित हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह 'वेट स्पेल' 23 मार्च तक बना रहेगा, जिसमें 19 और 20 मार्च को स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

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