आईसीएआई का पूरा नाम और महत्व: चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान की जानकारी
आईसीएआई का पूरा नाम और महत्व: चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान की जानकारी

Post by : Shivani Kumari

Nov. 4, 2025 12:28 p.m. 1561

भारत में सनदी लेखाकार (सीए) पेशे को नियंत्रित करने वाली शीर्ष संस्था भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) को लेकर छात्रों और अभिभावकों में रुचि लगातार बढ़ रही है। संसद द्वारा पारित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स अधिनियम, 1949 के तहत गठित यह संस्था देश में लेखा‑परीक्षण और लेखा व्यवसाय को विनियमित करने वाला प्रमुख राष्ट्रीय निकाय मानी जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य अकाउंटेंसी पेशे को व्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।​

भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान की स्थापना वर्ष 1949 में इस लक्ष्य के साथ की गई कि देश में वित्तीय लेखा‑परीक्षा की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो। यह संस्थान भारत सरकार के कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है और सार्वजनिक हित में आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समय के साथ संस्थान ने अपने पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण और मानकों को अद्यतन करते हुए बदलती आर्थिक और तकनीकी परिस्थितियों के अनुरूप ढाला है।​

आईसीएआई भारत में वित्तीय लेखांकन, लेखा‑परीक्षा और कराधान से जुड़ी सेवाओं के लिये आवश्यक योग्यता और आचार‑संहिता निर्धारित करता है। संस्थान द्वारा तैयार किये गये लेखा मानक कंपनियों और अन्य संस्थाओं की वार्षिक वित्तीय रिपोर्टों के लिये आधार बनते हैं, जिससे निवेशकों और आम जनता को सही और विश्वसनीय जानकारी मिलती है। साथ ही, अनुशासनात्मक तंत्र के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि सदस्य पेशेवर ईमानदारी और नैतिक मानकों का पालन करें।​

संस्थान देशभर के युवाओं के लिये सनदी लेखाकार बनने का संगठित मार्ग प्रदान करता है, जिसमें चरणबद्ध परीक्षाएँ और अनिवार्य प्रायोगिक प्रशिक्षण शामिल हैं। कठिन चयन प्रक्रिया के कारण इस पाठ्यक्रम को चुनौतीपूर्ण माना जाता है, लेकिन सफल अभ्यर्थियों के लिये बैंकिंग, उद्योग, सेवा क्षेत्र और स्व‑रोज़गार के रूप में व्यापक अवसर उपलब्ध होते हैं। विशेषज्ञों का मत है कि आर्थिक पारदर्शिता, कर अनुपालन और कॉर्पोरेट सुशासन पर बढ़ते ज़ोर के बीच आने वाले समय में सनदी लेखाकारों की भूमिका और अधिक निर्णायक हो जाएगी।

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