Post by : Shivani Kumari
हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास को प्राथमिकता देते हुए पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) के चुनाव को स्थगित रखने का फैसला बरकरार रखा है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता द्वारा 9 अक्टूबर को जारी आदेश के अनुसार, डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 की धारा 24(ई) के तहत यह स्थगन सड़कों की बहाली और कनेक्टिविटी सुनिश्चित होने तक लागू रहेगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि चुनाव स्थगित नहीं, बल्कि पोस्टपोन किए गए हैं, और 23 जनवरी 2026 तक की समयसीमा में इन्हें संपन्न कर लिया जाएगा। 17 अक्टूबर तक कोई नया अपडेट न आने से स्थिति यथावत है।
2025 मानसून (19 जून से सक्रिय) ने राज्य को बुरी तरह प्रभावित किया, जिसमें 47 बादल फटना, 98 बाढ़, 148 बड़े भूस्खलन दर्ज हुए। इससे 270 से अधिक मौतें, 198 सड़क हादसे, और सैकड़ों सड़कें-पुल क्षतिग्रस्त हुए। मंडी, कांगड़ा, हमीरपुर एवं शिमला के डिप्टी कमिश्नरों ने पंचायती राज विभाग को पत्र लिखकर चुनाव टालने का अनुरोध किया, क्योंकि राहत कार्य जारी हैं और मतदाताओं/कर्मचारियों की सुरक्षा जोखिम में है। मुख्य सचिव के आदेश में कहा गया: "राज्य भर में उचित कनेक्टिविटी बहाल होने के बाद ही चुनाव होंगे, ताकि मतदाता और कर्मी प्रभावित न हों।"
10 अक्टूबर को पत्रकारों से बातचीत में सुक्खू ने कहा, "प्रभावितों को राहत पहुंचाना पहली प्राथमिकता है। भाजपा हर मुद्दे को तोड़-मरोड़कर पेश करती है। 2023 की आपदा में भाजपा ने राजनीति की, जबकि हम जनहित में खड़े हैं। यह स्थगन डिजास्टर एक्ट के तहत है, न कि राजनीतिक। चुनाव 23 जनवरी तक हो जाएंगे।" उन्होंने भाजपा पर "ध्यान भटकाने" का आरोप लगाया, जो 2023 में सत्र बुलाने की मांग करती थी लेकिन चर्चा से वॉकआउट कर गई।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने इसे "लोकतंत्र पर हमला" बताया और कांग्रेस पर "चुनाव से भागने" का आरोप लगाया। पूर्व सीएम जय राम ठाकुर ने कहा, "सरकार हार के डर से भाग रही है। पहले शहरी निकाय चुनाव टाले, अब पीआरआई।" भाजपा प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने "लोकतांत्रिक मानदंडों का उल्लंघन" कहा।
दिसंबर 2025-जनवरी 2026 में 3,577 पंचायतों (प्रधान, उपप्रधान, वार्ड पंच), 12 जिला परिषदों, 91 ब्लॉक समितियों में चुनाव प्रस्तावित थे। राज्य चुनाव आयोग ने मतदाता सूची का ड्राफ्ट 6 अक्टूबर को जारी किया था, आपत्तियां 18-27 अक्टूबर तक दर्ज हो सकती हैं। स्थगन से ग्रामीण लोकतंत्र प्रभावित हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञ इसे "जनहित में आवश्यक" मानते हैं।
सरकार ने राहत पैकेज बढ़ाया: आवास, सड़क बहाली, कृषि नुकसान भरपाई। 2023 से बदतर आपदा में 500+ सड़कें अभी भी अवरुद्ध। सीएम ने वर्ल्ड बैंक के साथ ₹2,687 करोड़ HP-READY प्रोजेक्ट की समीक्षा की। भाजपा सांसदों से केंद्र से सहायता की मांग।
परिस्थितियां सुधरने पर चुनाव तारीखें घोषित होंगी। राज्य चुनाव आयोग (sechimachal.nic.in) पर अपडेट चेक करें। यह फैसला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच जनकल्याण को प्राथमिकता देता है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास को प्राथमिकता देते हुए पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) के चुनाव को स्थगित रखने का फैसला बरकरार रखा है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता द्वारा 9 अक्टूबर को जारी आदेश के अनुसार, डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 की धारा 24(ई) के तहत यह स्थगन सड़कों की बहाली और कनेक्टिविटी सुनिश्चित होने तक लागू रहेगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि चुनाव स्थगित नहीं, बल्कि पोस्टपोन किए गए हैं, और 23 जनवरी 2026 तक की समयसीमा में इन्हें संपन्न कर लिया जाएगा। 17 अक्टूबर तक कोई नया अपडेट न आने से स्थिति यथावत है।
2025 मानसून (19 जून से सक्रिय) ने राज्य को बुरी तरह प्रभावित किया, जिसमें 47 बादल फटना, 98 बाढ़, 148 बड़े भूस्खलन दर्ज हुए। इससे 270 से अधिक मौतें, 198 सड़क हादसे, और सैकड़ों सड़कें-पुल क्षतिग्रस्त हुए। मंडी, कांगड़ा, हमीरपुर एवं शिमला के डिप्टी कमिश्नरों ने पंचायती राज विभाग को पत्र लिखकर चुनाव टालने का अनुरोध किया, क्योंकि राहत कार्य जारी हैं और मतदाताओं/कर्मचारियों की सुरक्षा जोखिम में है। मुख्य सचिव के आदेश में कहा गया: "राज्य भर में उचित कनेक्टिविटी बहाल होने के बाद ही चुनाव होंगे, ताकि मतदाता और कर्मी प्रभावित न हों।"
10 अक्टूबर को पत्रकारों से बातचीत में सुक्खू ने कहा, "प्रभावितों को राहत पहुंचाना पहली प्राथमिकता है। भाजपा हर मुद्दे को तोड़-मरोड़कर पेश करती है। 2023 की आपदा में भाजपा ने राजनीति की, जबकि हम जनहित में खड़े हैं। यह स्थगन डिजास्टर एक्ट के तहत है, न कि राजनीतिक। चुनाव 23 जनवरी तक हो जाएंगे।" उन्होंने भाजपा पर "ध्यान भटकाने" का आरोप लगाया, जो 2023 में सत्र बुलाने की मांग करती थी लेकिन चर्चा से वॉकआउट कर गई।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने इसे "लोकतंत्र पर हमला" बताया और कांग्रेस पर "चुनाव से भागने" का आरोप लगाया। पूर्व सीएम जय राम ठाकुर ने कहा, "सरकार हार के डर से भाग रही है। पहले शहरी निकाय चुनाव टाले, अब पीआरआई।" भाजपा प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने "लोकतांत्रिक मानदंडों का उल्लंघन" कहा।
दिसंबर 2025-जनवरी 2026 में 3,577 पंचायतों (प्रधान, उपप्रधान, वार्ड पंच), 12 जिला परिषदों, 91 ब्लॉक समितियों में चुनाव प्रस्तावित थे। राज्य चुनाव आयोग ने मतदाता सूची का ड्राफ्ट 6 अक्टूबर को जारी किया था, आपत्तियां 18-27 अक्टूबर तक दर्ज हो सकती हैं। स्थगन से ग्रामीण लोकतंत्र प्रभावित हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञ इसे "जनहित में आवश्यक" मानते हैं।
सरकार ने राहत पैकेज बढ़ाया: आवास, सड़क बहाली, कृषि नुकसान भरपाई। 2023 से बदतरआपदा में 500+ सड़कें अभी भी अवरुद्ध। सीएम ने वर्ल्ड बैंक के साथ ₹2,687 करोड़ HP-READY प्रोजेक्ट की समीक्षा की। भाजपा सांसदों से केंद्र से सहायता की मांग।
परिस्थितियां सुधरने पर चुनाव तारीखें घोषित होंगी। राज्य चुनाव आयोग (sechimachal.nic.in) पर अपडेट चेक करें। यह फैसला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच जनकल्याण को प्राथमिकता देता है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास को प्राथमिकता देते हुए पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) के चुनाव को स्थगित रखने का फैसला बरकरार रखा है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता द्वारा 9 अक्टूबर को जारी आदेश के अनुसार, डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 की धारा 24(ई) के तहत यह स्थगन सड़कों की बहाली और कनेक्टिविटी सुनिश्चित होने तक लागू रहेगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि चुनाव स्थगित नहीं, बल्कि पोस्टपोन किए गए हैं, और 23 जनवरी 2026 तक की समयसीमा में इन्हें संपन्न कर लिया जाएगा। 17 अक्टूबर तक कोई नया अपडेट न आने से स्थिति यथावत है।
2025 मानसून (19 जून से सक्रिय) ने राज्य को बुरी तरह प्रभावित किया, जिसमें 47 बादल फटना, 98 बाढ़, 148 बड़े भूस्खलन दर्ज हुए। इससे 270 से अधिक मौतें, 198 सड़क हादसे, और सैकड़ों सड़कें-पुल क्षतिग्रस्त हुए। मंडी, कांगड़ा, हमीरपुर एवं शिमला के डिप्टी कमिश्नरों ने पंचायती राज विभाग को पत्र लिखकर चुनाव टालने का अनुरोध किया, क्योंकि राहत कार्य जारी हैं और मतदाताओं/कर्मचारियों की सुरक्षा जोखिम में है। मुख्य सचिव के आदेश में कहा गया: "राज्य भर में उचित कनेक्टिविटी बहाल होने के बाद ही चुनाव होंगे, ताकि मतदाता और कर्मी प्रभावित न हों।"
10 अक्टूबर को पत्रकारों से बातचीत में सुक्खू ने कहा, "प्रभावितों को राहत पहुंचाना पहली प्राथमिकता है। भाजपा हर मुद्दे को तोड़-मरोड़कर पेश करती है। 2023 की आपदा में भाजपा ने राजनीति की, जबकि हम जनहित में खड़े हैं। यह स्थगन डिजास्टर एक्ट के तहत है, न कि राजनीतिक। चुनाव 23 जनवरी तक हो जाएंगे।" उन्होंने भाजपा पर "ध्यान भटकाने" का आरोप लगाया, जो 2023 में सत्र बुलाने की मांग करती थी लेकिन चर्चा से वॉकआउट कर गई।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने इसे "लोकतंत्र पर हमला" बताया और कांग्रेस पर "चुनाव से भागने" का आरोप लगाया। पूर्व सीएम जय राम ठाकुर ने कहा, "सरकार हार के डर से भाग रही है। पहले शहरी निकाय चुनाव टाले, अब पीआरआई।" भाजपा प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने "लोकतांत्रिक मानदंडों का उल्लंघन" कहा।
दिसंबर 2025-जनवरी 2026 में 3,577 पंचायतों (प्रधान, उपप्रधान, वार्ड पंच), 12 जिला परिषदों, 91 ब्लॉक समितियों में चुनाव प्रस्तावित थे। राज्य चुनाव आयोग ने मतदाता सूची का ड्राफ्ट 6 अक्टूबर को जारी किया था, आपत्तियां 18-27 अक्टूबर तक दर्ज हो सकती हैं। स्थगन से ग्रामीण लोकतंत्र प्रभावित हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञ इसे "जनहित में आवश्यक" मानते हैं।
सरकार ने राहत पैकेज बढ़ाया: आवास, सड़क बहाली, कृषि नुकसान भरपाई। 2023 से बदतर आपदा में 500+ सड़कें अभी भी अवरुद्ध। सीएम ने वर्ल्ड बैंक के साथ ₹2,687 करोड़ HP-READY प्रोजेक्ट की समीक्षा की। भाजपा सांसदों से केंद्र से सहायता की मांग।
परिस्थितियां सुधरने पर चुनाव तारीखें घोषित होंगी। राज्य चुनाव आयोग (sechimachal.nic.in) पर अपडेट चेक करें। यह फैसला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच जनकल्याण को प्राथमिकता देता है।
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