Post by : Himachal Bureau
शिमला जिले में नशा तस्करी के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिला पुलिस ने एक सख्त और संगठित अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत बीते 28 दिनों में 22 आदतन और संगठित नशा तस्करों को पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रिवेंटिव डिटेंशन में लेकर तीन महीने के लिए जेल भेज दिया गया है। पुलिस का दावा है कि यह कार्रवाई नशा तस्करी के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल गिरफ्तारी तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अब इन आदतन तस्करों और उनके नेटवर्क की वित्तीय जांच भी की जाएगी। इसके तहत आरोपियों के परिवार के सदस्यों और नजदीकी रिश्तेदारों की आय के स्रोतों की भी जांच होगी। पुलिस यह पता लगाएगी कि अवैध कमाई को कहां और किस रूप में निवेश किया गया है। इस कदम का उद्देश्य नशे के कारोबार से जुड़े आर्थिक ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त करना है।
24 फरवरी को पुलिस ने पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए चौपाल निवासी संदीप कुमार उर्फ सैंडी को हिरासत में लेकर तीन महीने के लिए जेल भेज दिया। आरोपी के खिलाफ पहले से एनडीपीएस एक्ट के तहत तीन मामले दर्ज हैं। 7 दिसंबर 2021 को सदर थाना में उसके कब्जे से 26 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया था। 18 जून 2021 को थाना ढली में 11 ग्राम चिट्टा के साथ वह पकड़ा गया था। इसके अतिरिक्त 17 मार्च 2025 को थाना ढली में 2.170 ग्राम चिट्टा उसके पास से बरामद हुआ। लगातार नशा तस्करी की गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर पुलिस ने उसे नजरबंद करने के लिए यह कड़ी कार्रवाई की।
एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने जिले के सभी एसडीपीओ और थाना प्रभारियों को निर्देश जारी किए हैं कि अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय आदतन नशा तस्करों की पहचान कर उनके खिलाफ पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत फाइलें तैयार की जाएं। पुलिस का मानना है कि केवल मामलों का पंजीकरण पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसे लोगों को चिन्हित कर कड़ी कानूनी कार्रवाई करना आवश्यक है, जो युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेल रहे हैं।
शिमला पुलिस ने वर्ष 2026 में नशा तस्करी के खिलाफ विशेष अभियान चलाते हुए अब तक एनडीपीएस एक्ट के तहत 56 मामले दर्ज किए हैं और 108 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन मामलों में चिट्टा, चरस, अफीम और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी शामिल है। पुलिस ने इसके लिए विशेष जांच इकाई (एसआईयू) की टीम गठित की है, जिसमें 20 से अधिक अनुभवी जांच अधिकारियों को शामिल किया गया है। यह टीम दूसरे राज्यों से आने वाले नशा तस्करी के मामलों पर भी नजर रख रही है और लगातार छापेमारी तथा निगरानी अभियान चला रही है।
पुलिस अधिकारियों ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में नशा तस्करी से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। पुलिस का कहना है कि समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयास से ही नशे के इस जाल को समाप्त किया जा सकता है। युवाओं को नशे जैसी गंभीर समस्या से बचाने के लिए सामूहिक जागरूकता और कठोर कानूनी कार्रवाई दोनों आवश्यक हैं।
जिला पुलिस का दावा है कि 28 दिनों में 22 आदतन तस्करों को जेल भेजना एक बड़ी सफलता है और इससे नशा तस्करी के नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार हुआ है। प्रशासन का उद्देश्य केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे संगठित तंत्र को तोड़ना है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियों पर स्थायी रोक लगाई जा सके।
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