Author : Rajesh Vyas
पालमपुर, 13 मार्च 2026: चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर में रक्षा कर्मियों के लिए “कृषि, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन और बकरी पालन” विषय पर छठा दीर्घकालीन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आरम्भ किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. विनोद शर्मा, निदेशक प्रसार शिक्षा ने किया। उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. जी. डी. शर्मा, डॉ. कमल देव, डॉ. डी. के. बण्याल, डॉ. चन्द्रकान्ता वत्स और डॉ. राजन कटोच सहित कई अन्य प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे।
इस प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में कुल 34 रक्षा कर्मी भाग ले रहे हैं, जिनमें 23 भारतीय सेना, 9 भारतीय नौसेना और 2 भारतीय वायु सेना के जवान शामिल हैं। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को चारों विषयों में विस्तृत कक्षा व्याख्यान, प्रदर्शनी और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को ऐसे कौशल से लैस करना है, जिससे वे सेवानिवृत्ति के बाद कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में स्थायी आजीविका के अवसर विकसित कर सकें।
कुलपति प्रो. ए. के. पांडा का संदेश साझा करते हुए डॉ. विनोद शर्मा ने कहा कि यह प्रशिक्षण रक्षा कर्मियों के कौशल और क्षमता विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग कृषि, उद्यमिता और स्वरोजगार के लिए करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कृषि वानिकी, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन और बकरी पालन जैसी गतिविधियाँ ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिक अवसर प्रदान करती हैं।
प्रशिक्षण-प्रभारी डॉ. लव भूषण ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और पाठ्यक्रम के उद्देश्यों, संरचना और व्यावहारिक घटकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में विशेषज्ञ व्याख्यान, क्षेत्रीय प्रदर्शन और आधुनिक कृषि वानिकी, वैज्ञानिक मशरूम उत्पादन, उन्नत मधुमक्खी पालन तकनीकें और बकरी पालन प्रबंधन के व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल हैं।
विश्वविद्यालय के एनसीसी अधिकारी डॉ. अंकुर शर्मा ने पुनर्वास महानिदेशालय और विश्वविद्यालय के मध्य समन्वय की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस समन्वय के माध्यम से रक्षा कर्मियों को कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में वैज्ञानिक ज्ञान, व्यावहारिक कौशल और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
अंत में उद्घाटन सत्र के दौरान डॉ. भृगु नाथ सिन्हा, डॉ. सुमन कुमार, पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. बृज वनिता, डॉ. अंकज ठाकुर और श्री संजीव परमार भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों और विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के बीच एक संवाद सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने प्रश्न पूछे और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।
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