Post by : Himachal Bureau
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार द्वारा पंचायत चुनाव टालने के निर्णय की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'विकास विरोधी' करार दिया है। अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र सराज के छतरी प्रवास के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार ने आपदा का बहाना बनाकर चुनाव टाल दिए, लेकिन विडंबना यह है कि आपदा के नौ महीने बीत जाने के बाद भी धरातल पर पुनर्निर्माण और राहत कार्य कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि समय पर चुनाव संपन्न हो जाते, तो आज लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत पंचायतों में विकास कार्य युद्धस्तर पर चल रहे होते।
ग्रामीण क्षेत्रों में बदहाल बुनियादी ढांचे पर चिंता
जयराम ठाकुर ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार से निरंतर वित्तीय सहायता प्राप्त होने के बावजूद पंचायत स्तर पर विकास की गति पूरी तरह थमी हुई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कई हिस्सों में सड़कें आज भी मलबे से अटी पड़ी हैं, पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हैं और बिजली आपूर्ति की स्थिति दयनीय बनी हुई है। पुलिया निर्माण न होने के कारण ग्रामीणों को उबड़-खाबड़ रास्तों से पैदल सफर करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के लिए सत्ता केवल 'सुख भोगने' का साधन है, जबकि भाजपा ने हमेशा सत्ता को 'जनसेवा' का माध्यम माना है।
व्यवस्था परिवर्तन नहीं, यह 'व्यवस्था पतन' का दौर
सरकार के 'व्यवस्था परिवर्तन' के नारे पर कटाक्ष करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्तमान कार्यकाल में यह नारा 'व्यवस्था पतन' का प्रतीक बन गया है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान जनहित के बजाय अपने मित्रों को उपकृत करने और उनके निजी खजाने भरने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि इसके लिए पार्टी के कर्मठ नेताओं की अनदेखी की जा रही है और विकास कार्यों के बजाय चहेतों को लाभ पहुँचाना सरकार की प्राथमिकता बन गई है।
शिक्षा संस्थानों की उपेक्षा और युवाओं का भविष्य
सराज के छतरी कॉलेज और आईटीआई की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि दूरदराज के बच्चों को उच्च शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से इन संस्थानों की स्थापना की गई थी। हालांकि, वर्तमान सरकार ने आईटीआई के कई ट्रेड बंद कर दिए हैं और कॉलेज के अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है। इस संबंध में उन्होंने मौके पर ही तकनीकी शिक्षा मंत्री से फोन पर वार्ता कर सुझाव दिया कि आईटीआई के रिक्त भवन के एक हिस्से में कॉलेज को स्थानांतरित किया जाए ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इस दौरान उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थियों को ₹51,000 की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की और भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ आगामी सांगठनिक रणनीतियों पर चर्चा की।
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