हिमाचल में गुच्छी मशरूम का संकट, मौसम की मार से जंगलों से गायब
हिमाचल में गुच्छी मशरूम का संकट, मौसम की मार से जंगलों से गायब

Post by : Himachal Bureau

March 13, 2026 12:31 p.m. 2163

हिमालय के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली दुनिया की सबसे महंगी सब्जियों में शुमार 'गुच्छी मशरूम' पर इस साल मौसम की मार पड़ी है। जनवरी और फरवरी के महीनों में पर्याप्त बारिश और बर्फबारी न होने के कारण जंगलों की मिट्टी में आवश्यक नमी समाप्त हो गई है, जिसका सीधा असर गुच्छी के उत्पादन पर पड़ा है। आमतौर पर मार्च के महीने तक शिमला के बाजारों में गुच्छी की खेप पहुंचना शुरू हो जाती थी, लेकिन इस वर्ष यह दुर्लभ मशरूम जंगलों से पूरी तरह गायब है।

आजीविका का मुख्य स्रोत और बाजार की स्थिति,गुच्छी मशरूम न केवल स्वाद बल्कि औषधीय गुणों के लिए भी जानी जाती है। बाजार में इसकी कीमत ₹6,000 से लेकर ₹12,000 प्रति किलो तक होती है, जो इसे ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण जरिया बनाती है। शिमला के गंज बाजार के आढ़तियों के अनुसार, हर साल रामपुर, चौपाल और करसोग जैसे इलाकों से भारी मात्रा में गुच्छी पहुंचती थी, जिसे दिल्ली और विदेशों तक सप्लाई किया जाता था। इस बार आलम यह है कि दुकानों पर केवल पुरानी गुच्छी ही सैंपल के तौर पर बची है।

स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों की चिंता,जनेड़ घाट और कोटी क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि पिछले 20 वर्षों में ऐसी स्थिति केवल एक या दो बार ही देखने को मिली है। ग्रामीणों ने बताया कि वे उन जगहों पर भी गए जहां हर साल गुच्छी प्रचुर मात्रा में मिलती थी, लेकिन जमीन सूखी होने के कारण वहां कुछ भी नहीं मिला। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, बिजली कड़कने और पर्याप्त नमी से ही यह गुच्छी प्राकृतिक रूप से उगती है, लेकिन इस बार सूखे जैसे हालात ने सब कुछ बदल दिया है।

गुच्छी मशरूम के औषधीय लाभ,गुच्छी मशरूम प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन और मिनरल्स का भंडार मानी जाती है। यह मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ऊंचे इलाकों में पाई जाती है। स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी भारी मांग रहती है, परंतु इस वर्ष उत्पादन न होने से व्यापारियों और स्थानीय संग्राहकों  को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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