Post by : Himachal Bureau
एक महीने से अधिक समय से गोहर क्षेत्र में फैला पीलिया अब गंभीर और जानलेवा रूप लेता जा रहा है। लगातार बढ़ते मामलों ने स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। यदि समय रहते सरकार, प्रशासन और जल शक्ति विभाग द्वारा सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति और भी बेकाबू हो सकती है और कई लोगों की जान को खतरा हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस क्षेत्र में अब तक पीलिया के कुल 234 मामले सामने आ चुके हैं, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाते हैं।
खंड चिकित्सा अधिकारी बगस्याड़ डॉ. राकेश भारद्वाज ने इस स्थिति की पुष्टि करते हुए बताया कि कुल 234 मरीजों में से 200 लोग अब ठीक हो चुके हैं। हालांकि अभी भी 32 मरीज ऐसे हैं जो पीलिया से पीड़ित हैं और उनका इलाज चल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इस बीमारी के कारण दो लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जिनमें एक 22 वर्षीय युवक और इतनी ही उम्र की एक युवती शामिल हैं। युवती ने उपचार के दौरान पीजीआई चंडीगढ़ में अंतिम सांस ली। यह जानकारी इस बीमारी के गंभीर परिणामों की ओर संकेत करती है।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग और संबंधित टीमें लगातार सक्रिय हैं। बुधवार को कर्मचारियों द्वारा गोहर क्षेत्र में पानी के चार संयुक्त सैंपल लिए गए हैं। इन सैंपलों को विभिन्न प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पानी की गुणवत्ता इस बीमारी के फैलने का कारण तो नहीं है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति को लेकर और स्पष्टता सामने आएगी।
गोहर के साथ-साथ हमीरपुर के निकटवर्ती क्षेत्र बड़ू में भी पीलिया के कई मामले सामने आए हैं। यहां के कुछ गांवों, एक स्कूल और बहुतकनीकी संस्थान में दर्जनों लोग इस बीमारी से प्रभावित हुए हैं। कई लोग सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं, जबकि कुछ लोग पहले ही उपचार करवा चुके हैं। इससे यह साफ होता है कि समस्या केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी फैल रही है।
इन मामलों के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल पानी की गुणवत्ता को लेकर उठ रहा है। अधीक्षण अभियंता के अनुसार, राजकीय प्राथमिक पाठशाला स्वाहल की पानी की टंकी का सैंपल जांच में सही पाया गया है। लेकिन राजकीय उच्च पाठशाला स्वाहल के हैंडपंप का पानी जांच में सही नहीं पाया गया है। इसी स्कूल में पीलिया के लगभग 13 मामले सामने आए हैं, जिससे यह आशंका और मजबूत होती है कि दूषित पानी इस बीमारी के फैलने का मुख्य कारण हो सकता है।
बहुतकनीकी कॉलेज में भी पीलिया के मामलों में वृद्धि देखी गई है। स्कूल प्रबंधन के अनुसार, यहां करीब 35 लोग इस बीमारी से प्रभावित हुए हैं। यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है कि वे जल्द से जल्द इस बीमारी के स्रोत का पता लगाएं और उसे नियंत्रित करें।
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