गौतम गंभीर ने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए अदालत में मामला दर्ज कराया
गौतम गंभीर ने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए अदालत में मामला दर्ज कराया

Post by : Himachal Bureau

March 20, 2026 1:30 p.m. 2540

इंडियन क्रिकेट टीम के मुख्य कोच और दो बार के विश्व कप विजेता गौतम गंभीर ने अपने पर्सनैलिटी अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में मामला दायर किया है। उन्होंने अदालत में दावा किया है कि उनके नाम, तस्वीर और वीडियो का बिना अनुमति के इस्तेमाल कर प्रचार करने वाले और फर्जी वीडियो तथा ग़लत जानकारी फैलाने वाले लोग उनके अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं।

गंभीर ने अदालत से विशेष अनुरोध किया है कि उनके पर्सनैलिटी अधिकार का उल्लंघन करने वाली सभी ऑनलाइन सामग्री को तुरंत हटाया जाए। उन्होंने कुल 16 व्यक्तियों और संस्थाओं को इस मामले में पक्ष बनाया है, जिनके खिलाफ उन्होंने सिविल वाद दर्ज कराया है।

दो बार के विश्व कप विजेता गौतम गंभीर ने अदालत से 2.5 करोड़ रुपए हर्जाने की मांग की है। उनका कहना है कि उनके नाम और तस्वीरों का गलत इस्तेमाल कर उन्हें और उनके व्यक्तित्व को गंभीर नुकसान पहुँचाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के किसी भी ऑनलाइन दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

गंभीर के वकीलों ने अदालत में बताया कि फर्जी वीडियो, प्रचार सामग्री और नकली वीडियो के माध्यम से जनता में गलत संदेश फैलाया जा रहा है। इससे गंभीर की प्रतिष्ठा और छवि को नुकसान पहुँच रहा है। उन्होंने अदालत से निवेदन किया कि ऐसे सभी सामग्री को इंटरनेट से तुरंत हटाने का आदेश दिया जाए।

गंभीर का यह कदम यह स्पष्ट संदेश देता है कि व्यक्तिगत पहचान और पर्सनैलिटी अधिकार का सम्मान होना चाहिए। किसी भी प्रकार के गलत इस्तेमाल को गंभीरता से रोका जाना आवश्यक है। अदालत में दर्ज यह मामला पर्सनैलिटी अधिकारों की रक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस मामले के जरिए गौतम गंभीर यह दिखाना चाहते हैं कि कोई भी व्यक्ति या संस्था उनके नाम, तस्वीर या वीडियो का अनधिकृत उपयोग नहीं कर सकती। यदि ऐसा किया जाता है तो कानूनी कार्रवाई के तहत उन्हें हर्जाना भी देना होगा। अदालत से यह भी गुहार लगाई गई है कि भविष्य में इस तरह के उल्लंघन पर रोक लगाई जाए और ऑनलाइन फर्जी सामग्री को हटाने का स्पष्ट आदेश दिया जाए।

गंभीर ने अदालत में कहा कि उनका उद्देश्य केवल अपने अधिकारों की रक्षा करना है और जनता में गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। यह मामला पर्सनैलिटी अधिकारों की सुरक्षा और ऑनलाइन गलत जानकारी के प्रसार को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

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