Post by : Ram Chandar
हिमाचल: भारतीय क्रिकेट टीम के विस्फोटक बल्लेबाज रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का लंबी बीमारी के बाद दुखद निधन हो गया। खानचंद सिंह स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे और उन्हें करीब तीन दिन पहले ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। पिता की गंभीर स्थिति की खबर मिलते ही रिंकू सिंह टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बीच अपने पिता से मिलने अलीगढ़ आए थे। हालांकि, जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच से पहले वह फिर से टीम के साथ जुड़ गए।
रिंकू सिंह की सफलता के पीछे उनके पिता का संघर्ष और मेहनत हमेशा प्रेरणा के रूप में रही। खानचंद सिंह अलीगढ़ की गोविला गैस एजेंसी में हॉकर के रूप में काम करते थे। उन्होंने अपने पांच बच्चों और पत्नी बीना देवी के लिए कठिन परिश्रम किया और छोटे से दो कमरों वाले मकान में अपने परिवार का पालन-पोषण किया। रिंकू सिंह ने अपने पिता की मेहनत और संघर्ष को देखकर ही क्रिकेट में अपना करियर बनाने का संकल्प लिया। उनके पिता ने बचपन से ही रिंकू के क्रिकेट के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव मदद की और अपनी कमाई से गेंद, बल्ला, दस्ताने और अन्य क्रिकेट सामग्री उपलब्ध करवाई।
रिंकू ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत अलीगढ़ के अहिल्याबाई होल्कर स्टेडियम से की, जहां उन्होंने अंडर-16 क्रिकेट खेला। इसके बाद उन्होंने डीपीएस वर्ल्ड कप, अंडर-19 यूपी, रणजी ट्रॉफी और अंततः आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के लिए खेलकर अपनी पहचान बनाई। आईपीएल में गुजरात टाइटंस के खिलाफ पांच लगातार छक्के लगाने के बाद रिंकू की बल्लेबाजी चर्चा का विषय बन गई और उन्हें क्रिकेट प्रेमियों का नया स्टार माना जाने लगा।
रिंकू की इस सफलता में उनके कोच मसूद जफर अमीनी और मार्गदर्शक अर्जुन सिंह फकीरा का भी विशेष योगदान रहा। कोचों ने रिंकू की क्षमता और मेहनत को लगातार निखारा और हर मैच में उन्हें अधिक परिपक्व बनने में मदद की। रिंकू ने अपने करियर में लगातार KKR टीम द्वारा रिटेन होकर खुद को साबित किया। उनका आईपीएल सफर 2017 से शुरू होकर 2025 तक निरंतर सफलता की कहानी बन चुका है।
रिंकू सिंह की बल्लेबाजी और उनके पिता की संघर्षपूर्ण मेहनत का संगम ही उन्हें आज का स्टार बनाता है। उनके पिता का निधन न केवल परिवार के लिए, बल्कि अलीगढ़ और पूरे क्रिकेट प्रेमी समुदाय के लिए भी गहरा दुख है। रिंकू की सफलता की कहानी यह दर्शाती है कि एक बेटे की मेहनत और पिता का संघर्ष मिलकर किसी को भी स्टार बना सकते हैं।
रिंकू ने हमेशा अपने पिता की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश की। बचपन से ही उन्होंने अपने पिता की मेहनत और त्याग को देखकर यह सीखा कि सफलता केवल टैलेंट से नहीं, बल्कि कठिन परिश्रम, समर्पण और अनुशासन से मिलती है। आज रिंकू सिंह के क्रिकेट में चमकने के पीछे उनके पिता की मेहनत और संघर्ष की छाया हमेशा बनी रहेगी।
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