ऊना के छतैहड़ जंगल में खैर कटाई करते वन माफिया का आरोपी गिरफ्तार
ऊना के छतैहड़ जंगल में खैर कटाई करते वन माफिया का आरोपी गिरफ्तार

Post by : Himachal Bureau

May 26, 2026 3:36 p.m. 111

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में पंचायत चुनावों के बीच वन माफिया की सक्रियता एक बार फिर सामने आई है। बंगाणा उपमंडल के अंतर्गत आने वाले छतैहड़ डीपीएफ जंगल में दिनदहाड़े खैर के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला उजागर हुआ है। इस घटना ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है क्योंकि चुनावी माहौल का फायदा उठाकर जंगलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि वन विभाग की सतर्कता के चलते एक आरोपी को मौके पर ही रंगे हाथ पकड़ लिया गया है। वन विभाग कार्रवाई को लेकर इलाके में चर्चा तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार, वन विभाग की टीम सोमवार को नियमित गश्त पर थी। इस दौरान अरलू खंड के डिप्टी रेंजर राजेश कुमार और पिपलू बीट के वन रक्षक आकाश जंगल क्षेत्र में निरीक्षण कर रहे थे। तभी उन्हें जंगल के अंदर कुल्हाड़ी चलने की आवाज सुनाई दी। जब टीम ने आवाज का पीछा किया तो देखा कि एक व्यक्ति खैर के पेड़ों को काटकर लकड़ी तैयार कर रहा था। मौके पर पहुंचकर टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ लिया। खैर लकड़ी तस्करी का यह मामला गंभीर माना जा रहा है।

पकड़े गए आरोपी की पहचान बलवंत सिंह के रूप में हुई है। वन विभाग की टीम ने मौके से खैर की लकड़ी के कई टुकड़े बरामद किए, जिनकी संख्या लगभग 18 बताई जा रही है। विभाग के अनुसार जब्त की गई लकड़ी की अनुमानित कीमत करीब 48 हजार रुपये आंकी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह क्षेत्र जंगल के नजदीक होने के कारण यहां अवैध कटाई की आशंका पहले से बनी हुई थी। अब पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है ताकि पता लगाया जा सके कि इस गतिविधि में और कौन लोग शामिल हैं। वन माफिया पर कार्रवाई तेज कर दी गई है।

घटना के बाद डिप्टी रेंजर ने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए बंगाणा रेंज ऑफिसर अंकुश आनंद की शिकायत पर पुलिस में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। अब आगे की जांच पुलिस और वन विभाग मिलकर कर रहे हैं ताकि इस अवैध कारोबार की पूरी सच्चाई सामने आ सके। वन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की तैयारी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनावी व्यस्तता के बीच इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय हैं क्योंकि इससे प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंच सकता है। प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि जंगलों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। पंचायत चुनाव के दौरान इस तरह की घटनाएं प्रशासन के लिए चुनौती बन गई हैं।

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