Post by : Himachal Bureau
उच्चतम न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों को मिलने वाली बिजली रियायतों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की वर्ष 2019 की औद्योगिक नीति के तहत बिजली शुल्क में मिलने वाली विशेष रियायत केवल नई स्थापित औद्योगिक इकाइयों के लिए ही लागू होगी। जो पुरानी औद्योगिक इकाइयां अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता। इस फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को औद्योगिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
न्यायालय की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि औद्योगिक नीति की संबंधित धाराओं का उद्देश्य केवल नई इकाइयों को प्रोत्साहन देना था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बड़े पैमाने पर विस्तार करने वाली पुरानी इकाइयों के लिए अलग प्रावधान बनाए गए थे। इसलिए दोनों प्रकार की इकाइयों को समान श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने कहा कि नीति की भाषा और उसके नियमों को देखने से यह साफ हो जाता है कि बिजली रियायत का लाभ नई इकाइयों के लिए तय किया गया था। हिमाचल प्रदेश में इस फैसले के बाद उद्योगों से जुड़ी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
यह मामला उस समय सामने आया था जब एक निजी औद्योगिक इकाई ने अपने विस्तार कार्य के बाद बिजली शुल्क में रियायत की मांग की थी। इस कंपनी का कहना था कि उसे भी नई इकाइयों की तरह रियायती दरों का लाभ मिलना चाहिए। पहले उच्च न्यायालय ने कंपनी के पक्ष में फैसला देते हुए सरकार को ऊर्जा शुल्क में छूट देने के निर्देश दिए थे। लेकिन अब उच्चतम न्यायालय ने उस फैसले को रद्द कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि मौजूदा इकाइयों के विस्तार को नई औद्योगिक इकाई नहीं माना जा सकता। बिजली रियायत को लेकर यह फैसला राज्य सरकार के पक्ष में गया है।
न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि औद्योगिक नीति की अलग-अलग धाराओं में नई इकाइयों और विस्तार कर रही इकाइयों के लिए अलग-अलग प्रकार की सुविधाएं निर्धारित की गई थीं। अदालत ने नीति की पूरी संरचना का अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि रियायती बिजली दरें केवल नई परियोजनाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई थीं। वहीं विस्तार करने वाली इकाइयों के लिए अलग छूट व्यवस्था रखी गई थी। औद्योगिक नीति को लेकर आए इस फैसले को भविष्य के मामलों में भी अहम माना जा रहा है।
इस निर्णय के बाद राज्य सरकार को आर्थिक राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है क्योंकि इससे बड़े स्तर पर बिजली शुल्क में छूट देने का दबाव कम होगा। वहीं उद्योग जगत में इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नई औद्योगिक इकाइयों को बढ़ावा मिलेगा जबकि पुराने उद्योगों को अपनी विस्तार योजनाओं के लिए अलग रणनीति बनानी पड़ सकती है। हिमाचल सरकार ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे नीति के अनुरूप बताया है।
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