हिमाचल के 8 पारंपरिक उत्पादों को मिला GI टैग, जानिए किन चीजों को मिली नई पहचान?
हिमाचल के 8 पारंपरिक उत्पादों को मिला GI टैग, जानिए किन चीजों को मिली नई पहचान?

Post by : Himachal Bureau

July 2, 2026 2:46 p.m. 255

हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी पहचान मिली है। प्रदेश के सामाजिक, सांस्कृतिक, कृषि और हस्तशिल्प से जुड़े आठ पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्रदान किया गया है। इस उपलब्धि के साथ अब हिमाचल प्रदेश के कुल 17 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है।

राज्य सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय उत्पादों की पहचान मजबूत होगी और उन्हें देश-विदेश के बाजारों में नई पहचान मिलेगी। यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद के प्रयासों से संभव हुई है। सरकार का कहना है कि जीआई टैग मिलने से स्थानीय कारीगरों, किसानों और उत्पादकों को आर्थिक लाभ मिलने के साथ उनकी पारंपरिक कला और संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा।

GI (Geographical Indication) Tag किसी ऐसे उत्पाद को दिया जाता है, जिसकी गुणवत्ता, पहचान या विशेषता किसी खास क्षेत्र से जुड़ी होती है। यह टैग बताता है कि संबंधित उत्पाद उसी क्षेत्र की पारंपरिक पहचान है और उसकी विशेष गुणवत्ता वहीं की भौगोलिक परिस्थितियों या स्थानीय कौशल के कारण विकसित हुई है। जीआई टैग मिलने के बाद उस उत्पाद की अलग पहचान बनती है। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलती है और असली उत्पाद बनाने वाले किसानों, कारीगरों और स्थानीय समुदाय को आर्थिक लाभ मिलता है।

इन 8 उत्पादों को मिला GI टैग

इस बार जिन आठ उत्पादों को जीआई टैग मिला है, उनमें स्पीति का सीबकथॉर्न (छरमा), सलूणी का सफेद मक्का, चंबा की धातु कला, सिरमौरी लोइया, किन्नौरी टोपी, मंडी की सेपू वड़ी, किन्नौरी सेब और किन्नौरी आभूषण शामिल हैं। ये सभी उत्पाद अपनी गुणवत्ता, पारंपरिक निर्माण शैली और क्षेत्रीय पहचान के लिए लंबे समय से प्रसिद्ध रहे हैं। अब जीआई टैग मिलने के बाद इनकी पहचान और मजबूत होगी।

प्रदेश के कुल 17 उत्पादों को मिल चुका है GI टैग

आठ नए उत्पादों के शामिल होने के बाद अब हिमाचल प्रदेश के कुल 17 पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है। इससे प्रदेश उन राज्यों में शामिल हो रहा है, जहां स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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मुख्यमंत्री ने दी प्रदेशवासियों को बधाई

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पिछले साढ़े तीन वर्षों से प्रदेश की पारंपरिक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पहचान दिलाने के लिए लगातार काम कर रही है। जीआई टैग मिलना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

चार और उत्पादों को दिलाया जाएगा GI टैग

राज्य सरकार अब चार अन्य पारंपरिक उत्पादों को भी जीआई टैग दिलाने की तैयारी कर रही है। इनमें चंबा के पांगी क्षेत्र का भोट जौ, चंबा चुख, भरमौर क्षेत्र का प्लेक्ट्रैंथस शहद और सिरमौर की अदरक शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को इन सभी उत्पादों के जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं, ताकि जल्द ही इन्हें भी यह विशेष पहचान मिल सके।

स्थानीय किसानों और कारीगरों को मिलेगा बड़ा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने से हिमाचल के किसानों, हस्तशिल्प कारीगरों और छोटे उत्पादकों को बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा। इससे उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी, बाजार का दायरा विस्तृत होगा और नकली उत्पादों पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।

राज्य सरकार को उम्मीद है कि आने वाले समय में हिमाचल के पारंपरिक उत्पाद राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मजबूत पहचान बनाएंगे। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्थानीय संस्कृति व पारंपरिक विरासत को संरक्षण भी मिलेगा।

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