हिमाचल को 16वीं वित्त आयोग से बड़ा आर्थिक लाभ मिला
हिमाचल को 16वीं वित्त आयोग से बड़ा आर्थिक लाभ मिला

Post by : Himachal Bureau

Feb. 3, 2026 10:51 a.m. 130

हिमाचल प्रदेश को सोलहवें वित्त आयोग के तहत आर्थिक रूप से लाभ प्राप्त हुआ है। राज्य का हिस्सा विभाज्य कर कोष में पंद्रहवें वित्त आयोग के 0.83 प्रतिशत से बढ़कर अब 0.914 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2025-26 में हिमाचल प्रदेश को लगभग 2,388 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय मिलने की संभावना है।

यह जानकारी पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने दी। उन्होंने बताया कि सोलहवें वित्त आयोग ने सामान्य रूप से राजस्व घाटा अनुदान को समाप्त कर दिया है। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि पंद्रहवें वित्त आयोग के तहत दिए गए राजस्व घाटा अनुदान अस्थायी प्रकृति के थे और इन्हें कोविड-19 महामारी के दौरान राज्यों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से लागू किया गया था।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि पंद्रहवें वित्त आयोग के राजस्व घाटा अनुदान का मुख्य उद्देश्य यह था कि वर्ष 2025-26 तक राज्यों का राजस्व घाटा लगभग समाप्त किया जा सके। सोलहवें वित्त आयोग ने नियमित अनुदानों को इसलिए समाप्त किया क्योंकि कुछ राज्यों में, जिनमें हिमाचल प्रदेश भी शामिल है, कर संग्रह अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ सका और खर्च लगातार अधिक रहा, जिससे स्थायी वित्तीय सुधार नहीं हो पाए।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राज्य की स्वयं की कर क्षमता सकल राज्य घरेलू उत्पाद का केवल 5.6 प्रतिशत है, जबकि राजस्व व्यय लगभग 21 प्रतिशत के स्तर पर बना हुआ है। इसके साथ ही राज्य पर कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है, जिससे वित्तीय चुनौतियां और गंभीर होती जा रही हैं।

अनुराग ठाकुर ने स्पष्ट किया कि सोलहवें वित्त आयोग के तहत किया गया आवंटन किसी प्रकार के पक्षपात पर आधारित नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह वस्तुनिष्ठ और तय मानकों के आधार पर किया गया है। उन्होंने राज्य सरकार को वित्तीय अनुशासन मजबूत करने, कर संग्रह में सुधार लाने और भविष्य के विकास के लिए निवेश बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।

उन्होंने यह भी कहा कि सोलहवें वित्त आयोग के अंतर्गत बढ़े हुए केंद्रीय हस्तांतरण हिमाचल प्रदेश के लिए विकास का एक मजबूत अवसर प्रदान करते हैं। यदि राज्य सरकार इन संसाधनों का सही दिशा में उपयोग करे और आर्थिक सुधारों की ओर गंभीरता से कदम बढ़ाए, तो प्रदेश की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ किया जा सकता है।

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