बलोह गांव के कुश्ती मेले में उमड़ा जनसैलाब, डॉ वर्मा ने युवाओं को दिया प्रेरणादायक संदेश
बलोह गांव के कुश्ती मेले में उमड़ा जनसैलाब, डॉ वर्मा ने युवाओं को दिया प्रेरणादायक संदेश

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

April 16, 2026 10:50 a.m. 130

हमीरपुर जिले के बलोह गांव में आयोजित पारंपरिक कुश्ती मेला इस बार पूरे जोश और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और पूरे दिन मेले का आनंद लेते रहे। गांव का माहौल पूरी तरह से उत्सव जैसा नजर आया, जहां हर तरफ लोगों में खुशी और उत्साह देखने को मिला। इस खास मौके पर समाजसेवी और कांग्रेस नेता डॉ. पुष्पिंदर वर्मा ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई और मेले की रौनक को और बढ़ाया।

इस पारंपरिक आयोजन में कुश्ती के कई मुकाबले हुए, जिसमें अलग-अलग जगहों से आए पहलवानों ने अपनी ताकत और कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। दर्शकों ने हर मुकाबले का खूब आनंद लिया और पहलवानों का हौसला बढ़ाया। यह कुश्ती मेला गांव की पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जिसे हर साल बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

इस मौके पर बोलते हुए डॉ. पुष्पिंदर वर्मा ने कहा कि ऐसे दंगल हमारी संस्कृति की पहचान हैं और इन्हें बचाए रखना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि कुश्ती केवल एक खेल नहीं है, बल्कि यह युवाओं को अनुशासन, मेहनत और फिट रहने की सीख देती है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे खेलों में आगे आएं और अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर ही मजबूत समाज की नींव होता है।

डॉ. वर्मा ने आगे कहा कि आज के समय में जब युवा मोबाइल और अन्य चीजों में ज्यादा व्यस्त हो रहे हैं, तब ऐसे आयोजन उन्हें जमीन से जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेलों के माध्यम से युवा न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनते हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी सशक्त होते हैं। इस तरह के आयोजन उन्हें अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि गांवों में होने वाले ऐसे मेले समाज में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देते हैं। लोग एक साथ मिलकर इन आयोजनों को सफल बनाते हैं, जिससे समाज में सकारात्मक माहौल बनता है। उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम लगातार होते रहने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी परंपराओं को समझ सकें और उन्हें आगे बढ़ा सकें।

इस दौरान क्षेत्र के कई गणमान्य लोग, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया। मेले में लोगों ने न केवल कुश्ती के मुकाबलों का आनंद लिया, बल्कि आपसी मेलजोल और भाईचारे का भी अनुभव किया। यह आयोजन गांव में पारंपरिक खेलों और सामाजिक एकता को जीवित रखने का एक अच्छा उदाहरण बना।

अंत में डॉ. वर्मा ने युवाओं से अपील की कि वे खेलों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं और नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहें। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को सही दिशा देने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और समाज को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं। यह पूरा आयोजन गांव में परंपराओं के महत्व को फिर से उजागर करने वाला साबित हुआ।

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