Post by : Shivani Kumari
हमीरपुर जिले में घटी एक भयावह घटना ने पूरे हिमाचल प्रदेश को हिला दिया है। खेत में काम कर रही 40 वर्षीय महिला की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस घटना ने न केवल अपराध की गंभीरता को उजागर किया है बल्कि आरोपी की उम्र पर उठे संदेहों ने मामले को और उलझा दिया है। बताया गया है कि आरोपी की उम्र मात्र 14 वर्ष दर्ज है, परंतु ग्रामीणों का कहना है कि वह लगभग 24 वर्ष का युवक है जिसने कानून की कमियों का लाभ उठाने की कोशिश की। यह विवाद अब जांच का प्रमुख बिंदु बन गया है।
घटना के अनुसार, महिला अपने खेत में काम कर रही थी जब आरोपी ने वहां पहुंचकर उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। विरोध करने पर उसने दराती से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल महिला को पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया, जहां छह दिन बाद उसने दम तोड़ दिया। इस वारदात के बाद पूरे इलाके में गुस्से की लहर फैल गई। ग्रामीणों ने बताया कि आरोपी का आचरण किसी किशोर जैसा नहीं था—उसका हावभाव, कद-काठी और बोलचाल सब कुछ एक वयस्क व्यक्ति की तरह था। इसी कारण उन्होंने पुलिस से आरोपी की वास्तविक उम्र की जांच की मांग की।
हमीरपुर के पुलिस अधीक्षक भगत सिंह ने कहा कि दस्तावेजों के अनुसार आरोपी अगस्त 2011 में जन्मा है, जिससे उसकी उम्र 14 वर्ष होती है। उन्होंने बताया कि पंचायत और स्कूल रिकॉर्ड दोबारा मंगवाए गए हैं और यदि किसी प्रकार की विसंगति पाई जाती है तो चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाएगा। हत्या के बाद आरोपी फरार हो गया था, लेकिन पुलिस ने तकनीकी निगरानी और ग्रामीणों की सहायता से उसे गिरफ्तार कर लिया। घटना के विरोध में ग्रामीणों ने झनियारी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रदर्शन किया। पूछताछ में आरोपी ने अपराध स्वीकार करते हुए कहा कि उसने गुस्से में आकर वार किया था।
प्रदेश भर में महिला संगठनों और नागरिकों ने इस जघन्य अपराध की निंदा की और दोषी को कड़ी सजा देने की मांग की। लोगों का कहना है कि चाहे आरोपी नाबालिग ही क्यों न हो, ऐसे मामलों में कानून को कठोर होना चाहिए ताकि समाज में भय और अनुशासन का वातावरण बने। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोपी की उम्र 18 वर्ष से कम पाई जाती है तो उसे किशोर न्याय अधिनियम के तहत सुधार गृह भेजा जाएगा। परंतु यदि उसकी वास्तविक उम्र 18 वर्ष से अधिक सिद्ध होती है, तो उस पर हत्या और दुष्कर्म के प्रयास की सामान्य धाराओं में मुकदमा चलेगा।
यह घटना उस समय सामने आई है जब प्रदेश सरकार महिला सुरक्षा पर विशेष अभियान चला रही थी। विपक्ष ने सरकार पर कानून व्यवस्था की विफलता के आरोप लगाए हैं। सामाजिक संगठनों ने सुझाव दिया है कि गांवों में सीसीटीवी कैमरे, रात्रिकालीन गश्त और आत्मरक्षा प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाए। हमीरपुर को सामान्यतः शांत और शिक्षित जिला माना जाता है, लेकिन इस घटना ने समाज के नैतिक पतन की गहराई को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, नशे की लत, सोशल मीडिया का दुरुपयोग और पारिवारिक अनुशासन की कमी ऐसे अपराधों की जड़ हैं।
अब सबकी निगाहें पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह स्पष्ट करेगी कि आरोपी किशोर है या वयस्क। लेकिन एक बात निश्चित है—यह घटना हिमाचल प्रदेश की सामाजिक व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर एक गहरा प्रश्नचिह्न छोड़ गई है। यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि समाज को अपने नैतिक मूल्यों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।
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