Post by : Himachal Bureau
भारतीय क्रिकेट टीम के टी-20 कप्तान सूर्यकुमार यादव ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपने दिल की बात साझा करते हुए कहा कि वह टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहते हैं और इस प्रारूप के प्रति उनका लगाव आज भी वैसा ही है। उन्होंने साफ कहा कि क्रिकेट की शुरुआत उन्होंने लाल गेंद से की थी और यही फॉर्मेट उनके करियर की मजबूत नींव रहा है।
सूर्यकुमार ने बताया कि उन्होंने करीब 10 से 12 साल तक रणजी ट्रॉफी में खेलते हुए लाल गेंद से काफी अनुभव हासिल किया। मुंबई जैसे बड़े क्रिकेट केंद्र में पले-बढ़े होने के कारण उनका शुरुआती फोकस भी टेस्ट क्रिकेट पर ही रहा। उन्होंने कहा कि उस समय उनका पूरा खेल इसी प्रारूप के आसपास घूमता था।
हालांकि समय के साथ उनका झुकाव सफेद गेंद के क्रिकेट की ओर बढ़ता गया। उन्होंने खासकर टी-20 क्रिकेट में खुद को बेहतर तरीके से ढाल लिया और इस प्रारूप में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। सूर्यकुमार ने अपने अंदाज में कहा कि टी-20 में उनका “हाथ सेट हो गया है”, यानी अब वह इस फॉर्मेट में पूरी तरह सहज हो चुके हैं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वनडे क्रिकेट में उन्होंने अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश की, लेकिन वह ज्यादा सफल नहीं हो पाए। इसके विपरीत टी-20 में उन्होंने अपनी खास पहचान बनाई और आज वह इस फॉर्मेट के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में गिने जाते हैं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह फिर से टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहेंगे, तो उन्होंने बिना झिझक कहा कि अगर उन्हें मौका मिलता है तो वह जरूर खेलना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि लाल गेंद से खेलना उनके लिए हमेशा खास रहा है और वह इस अनुभव को फिर से जीना चाहते हैं।
सूर्यकुमार यादव ने अपने टेस्ट करियर को याद करते हुए बताया कि उन्हें 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नागपुर में एक टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला था। हालांकि उस मैच में वह ज्यादा रन नहीं बना सके, लेकिन उनके लिए वह अनुभव बहुत खास रहा।
उन्होंने यह भी माना कि मौजूदा समय में, खासकर 35 साल की उम्र में, टेस्ट टीम में जगह बनाना आसान नहीं है। टीम में कई युवा खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है। इसके अलावा, उन्होंने 2023 के वनडे विश्व कप फाइनल का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने हिस्सा लिया था, लेकिन भारत को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्हें वनडे टीम में ज्यादा मौके नहीं मिले।
सूर्यकुमार यादव का मानना है कि हर खिलाड़ी को अपने मजबूत प्रारूप पर ध्यान देना चाहिए और उनके लिए टी-20 वही प्रारूप है। लेकिन इसके बावजूद टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका सम्मान और खेलने की इच्छा आज भी बरकरार है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या उन्हें फिर से टेस्ट टीम में मौका मिलता है या नहीं, लेकिन इतना जरूर है कि उनका जुनून और मेहनत उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहेगी।
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