Post by : Shivani Kumari
गुवाहाटी के मैदान में 30 सितम्बर 2025 को जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को 59 रनों से हराकर आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप की शानदार शुरुआत की, तब पूरे देश में जश्न का माहौल था। इस ऐतिहासिक जीत के केंद्र में रहीं हिमाचल प्रदेश की तेज़ गेंदबाज़ रेणुका सिंह ठाकुर, जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 15 विकेट लेकर भारत को विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई। उनके शानदार प्रदर्शन पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने उन्हें एक करोड़ रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की। यह जीत केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरे महिला क्रिकेट जगत के लिए मील का पत्थर साबित हुई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अनुसार, 2025 के विश्व कप की वैश्विक दर्शक संख्या 2022 की तुलना में 35 प्रतिशत अधिक रही, जो महिला क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है।
रेणुका की कहानी प्रेरणा से भरी है। वर्ष 2009 में उन्होंने धर्मशाला स्थित हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ की आवासीय अकादमी में प्रशिक्षण लेना शुरू किया। सीमित साधनों में अपने गांव में कपड़े की गेंद से अभ्यास करने वाली रेणुका ने तेज़ गेंदबाज़ी की कला में निपुणता हासिल की। 2019-20 के वरिष्ठ महिला एकदिवसीय टूर्नामेंट में सबसे अधिक विकेट लेकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2022 में राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने सर्वाधिक 11 विकेट लेकर भारत को रजत पदक जिताने में योगदान दिया। 2025 में उनके अंतरराष्ट्रीय आँकड़े 41 विकेट तक पहुँच गए, औसत 25.83 के साथ। पूर्व भारतीय क्रिकेटर अंजुम चोपड़ा ने कहा, “रेणुका की स्विंग कराने की कला और दबाव में नियंत्रण अद्वितीय है।”
उनकी कहानी संघर्ष और समर्पण की मिसाल है। पिता के निधन के बाद उनकी मां सुनीता ठाकुर ने कठिन परिस्थितियों में भी बेटी के सपनों को उड़ान दी। रेणुका ने अपने दाहिने हाथ पर पिता का चित्र गुदवाया है, जो उनके हर ओवर के साथ पिता के सपने को पूरा करने की याद दिलाता है। इंटरनेट पर “रेणुका सिंह क्रिकेट” और “महिला क्रिकेट 2025” जैसे शब्द तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, जो दिखाता है कि महिला क्रिकेट के प्रति देश की रुचि लगातार बढ़ रही है।
2025 का विश्व कप भारत के छह शहरों में खेला गया, जिसमें 17 मुकाबले हुए। भारत ने श्रीलंका को 59 रनों से हराया और सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रेणुका के 4 विकेट पर 22 रन के शानदार प्रदर्शन से मैच पलट गया। फाइनल इंग्लैंड के खिलाफ 25 अक्तूबर को हुआ, जिसे 21 लाख दर्शकों ने डिजिटल मंचों पर देखा — 2022 की तुलना में 45 प्रतिशत अधिक। यह वृद्धि बताती है कि महिला क्रिकेट का दायरा अब पहले से कहीं अधिक व्यापक हो गया है। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि रेणुका “राज्य की बेटियों के लिए प्रेरणा का दीपक” हैं।
रेणुका की सफलता का प्रभाव खेल से आगे तक फैला है। 2025 की इस जीत के बाद महिला खेल प्रायोजन में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें जानी-मानी कंपनियों ने महिला खिलाड़ियों में निवेश बढ़ाया। हिमाचल प्रदेश खेल विभाग के अनुसार, रेणुका की उपलब्धि के बाद राज्य में लड़कियों के क्रिकेट प्रशिक्षण केंद्रों में दाख़िले में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सामाजिक स्तर पर भी उनका संघर्ष प्रेरक है। पिता की मृत्यु के बाद एकल माता द्वारा पाली गई रेणुका की कहानी हजारों ग्रामीण परिवारों के लिए उदाहरण बन गई है। समाजशास्त्री डॉ. ऋतु मेहरा के अनुसार, “रेणुका का उत्थान इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा और दृढ़ निश्चय सामाजिक सीमाओं से परे हैं।” फिर भी चुनौतियाँ बनी हुई हैं — महिला क्रिकेटरों को आज भी पुरुष खिलाड़ियों की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत कम वेतन मिलता है।
आगे की दृष्टि से रेणुका का सफर महिला क्रिकेट की दिशा बदल सकता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने वर्ष 2030 तक महिला क्रिकेट के विकास पर 50 मिलियन डॉलर निवेश की घोषणा की है, जिसमें भारत को प्रमुख केंद्र बनाया गया है। रेणुका के आँकड़ों और भारतीय महिला टीम के प्रति लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है। पूर्व कप्तान मिताली राज ने कहा, “हमें इस गति को बनाए रखने के लिए अधिक घरेलू प्रतियोगिताओं और बेहतर संरचना की आवश्यकता है।” रेणुका अब 2026 में ऑस्ट्रेलिया दौरे की तैयारी कर रही हैं, जहाँ उनका अगला लक्ष्य एक और शानदार प्रदर्शन करना है।
भारत की इस जीत ने न केवल महिला क्रिकेट को नई ऊँचाई दी, बल्कि खेल, मीडिया और प्रायोजन के क्षेत्र में भी नई ऊर्जा भर दी। क्रिकेट विश्व कप 2025 परिणाम जैसे शब्द इंटरनेट पर शीर्ष खोजों में हैं, जो इस उपलब्धि के प्रभाव को दर्शाते हैं।
अंततः, रेणुका सिंह ठाकुर की 2025 विश्व कप विजय ने भारत को गौरवान्वित किया और महिला क्रिकेट को नई पहचान दी। उनके 15 विकेट, एक करोड़ रुपये का सम्मान और लाखों लोगों की प्रशंसा उन्हें आने वाली पीढ़ी की प्रेरणा बना चुके हैं। चुनौतियाँ अभी बाकी हैं, पर उनका सफर यह साबित करता है कि यदि विश्वास और परिश्रम साथ हों, तो इतिहास खुद लिखा जा सकता है।
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