हिमाचल में सौर ऊर्जा से बढ़ी आय, नवीकरणीय स्रोतों से मिले 1,004 करोड़
हिमाचल में सौर ऊर्जा से बढ़ी आय, नवीकरणीय स्रोतों से मिले 1,004 करोड़

Post by : Himachal Bureau

March 16, 2026 11:20 a.m. 157

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के कुशल नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य को देश का 'हरित राज्य' बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। सरकार द्वारा ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का विस्तार करने और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई विभिन्न पहलों के अब सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखने लगे हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश की प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं ने लगभग 2,534 मिलियन यूनिट बिजली का रिकॉर्ड उत्पादन किया है।

विद्युत उत्पादन में हुई इस भारी वृद्धि की बदौलत राज्य सरकार के खजाने में 1,004 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो प्रदेश की आर्थिकी को मजबूत करने में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए राज्य सरकार ने सौर ऊर्जा को विशेष प्राथमिकता दी है। सरकार ने आगामी दो वर्षों के भीतर प्रदेश में 500 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

इस दिशा में कार्य करते हुए जिला ऊना और बिलासपुर में पेखुबेला, भंजाल, अघलौर और बैरा डोल जैसी सौर परियोजनाओं को सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है। लगभग 52 मेगावाट की कुल क्षमता वाली इन परियोजनाओं से अब तक 114.27 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हो चुका है, जिससे सरकारी खजाने में 34.83 करोड़ रुपये का राजस्व जमा हुआ है। यह सफलता न केवल ऊर्जा स्रोतों में विविधता ला रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा योगदान है।

प्रदेश सरकार का दृष्टिकोण केवल राजस्व कमाने तक सीमित नहीं है, बल्कि दूरदराज के दुर्गम इलाकों तक बिजली पहुँचाना भी उनकी प्राथमिकता है। जनजातीय क्षेत्रों में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसी कड़ी में लाहौल-स्पीति जिले के काजा क्षेत्र के ऊंचाई पर स्थित गांवों के 148 घरों में सौर ऑफ-ग्रिड प्रणालियां स्थापित की गई हैं। इससे उन परिवारों को रोशन किया गया है जो कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मुख्य ग्रिड से नहीं जुड़ पाए थे।

इसके अतिरिक्त, पांगी घाटी के हिलोर और धरवास जैसे सुदूर गांवों में 400 किलोवाट क्षमता के बैटरी ऊर्जा भंडारण तंत्र  स्थापित किए जा रहे हैं। इन प्रणालियों के सक्रिय होने से सर्दियों के कठिन समय में भी इन दुर्गम क्षेत्रों में बिना किसी बाधा के बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। सरकार की ये नीतियां न केवल औद्योगिक विकास को गति दे रही हैं, बल्कि राज्य के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन स्तर में भी सुधार ला रही हैं।

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