महिला आरक्षण पर जनमत संग्रह,63% लोग सरकारी नौकरियों में 25% कोटे के खिलाफ
महिला आरक्षण पर जनमत संग्रह,63% लोग सरकारी नौकरियों में 25% कोटे के खिलाफ

Post by : Himachal Bureau

March 16, 2026 6:14 p.m. 115

हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार द्वारा सरकारी नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से घोषित '25 प्रतिशत आरक्षण' के फैसले पर प्रदेश की जनता ने मिली-जुली परंतु कड़े विरोध वाली प्रतिक्रिया दी है। 'दिव्य हिमाचल मीडिया हाउस' द्वारा हाल ही में आयोजित एक साप्ताहिक जनमत सर्वेक्षण  के रुझानों ने इस मुद्दे पर एक नई बहस छेड़ दी है।

सर्वे में जनता से सीधा सवाल पूछा गया था कि 'क्या आप सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 25 प्रतिशत आरक्षण देने के निर्णय से सहमत हैं?' इस सवाल के जवाब में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जहाँ 63 प्रतिशत लोगों ने इस पहल के विरोध में 'नहीं' का विकल्प चुना। वहीं, मात्र 35 प्रतिशत लोगों ने सरकार के इस कदम का समर्थन करते हुए 'हाँ' में अपनी राय दी, जबकि 2 प्रतिशत लोग अपनी राय स्पष्ट नहीं कर पाए।

इस डिजिटल सर्वे में कुल 975 लोगों ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की, जिसमें सबसे अधिक प्रतिक्रियाएं यूट्यूब (602 रिएक्शन) पर प्राप्त हुईं। इसके अतिरिक्त फेसबुक और न्यूज़ वेबसाइट के माध्यम से भी जनता ने अपनी बात रखी। सर्वे के दौरान कमेंट सेक्शन में लोगों का आक्रोश और तर्क स्पष्ट रूप से देखने को मिले। सोशल मीडिया पर नीतू ठाकुर और रुचि शर्मा जैसे यूज़र्स ने तर्क दिया कि वास्तविक 'बराबरी' का अर्थ बिना किसी आरक्षण के योग्यता को तवज्जो देना है।

कई लोगों का मानना है कि जाति या लिंग के आधार पर कोटा देने के बजाय केवल काबिलियत को ही चयन का आधार बनाया जाना चाहिए। वहीं, कुछ लोगों ने तंज कसते हुए इसे केवल 'वोट बैंक की राजनीति' करार दिया और सुझाव दिया कि यदि सरकार वास्तव में गंभीर है, तो महिलाओं को नौकरियों के बजाय विधानसभा में आरक्षण दिया जाना चाहिए।वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के पुलिस विभाग में महिलाओं को पहले से ही 30 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है, साथ ही एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणियों के तहत भी कोटे की व्यवस्था लागू है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का तर्क है कि 'क्लास-थ्री' की नौकरियों में 25 प्रतिशत कोटा मिलने से सरकारी तंत्र में नारी शक्ति की सहभागिता बढ़ेगी और सामाजिक संतुलन स्थापित होगा। हालांकि, सर्वे के परिणामों से स्पष्ट है कि जनता का एक बड़ा वर्ग आरक्षण के स्थान पर 'ओपन कंपटीशन' और योग्यता आधारित चयन के पक्ष में है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता के इस व्यापक विरोध के बीच सरकार इस दिशा में अपने कदम कैसे आगे बढ़ाती है।

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