Post by : Khushi Joshi
धर्मशाला के पुलिस ग्राउंड में गुरुवार को हिमाचल के विभिन्न जिलों से आए हजारों कर्मचारी और पेंशनर्स एकत्र हुए और सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। यह प्रदर्शन भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष घनश्याम शर्मा के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें सरकारी विभागों से जुड़े मौजूदा कर्मचारी, सेवानिवृत्त कर्मचारी, शिक्षक, स्वास्थ्य कर्मी और अन्य संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान पूरा मैदान नारों और मांगों की आवाज से गूंज उठा, जिससे साफ संकेत मिला कि कर्मचारियों के भीतर गहरी नाराजगी है।
सभा को संबोधित करते हुए घनश्याम शर्मा ने कहा कि सरकार ने चुनाव से पहले कर्मचारियों और पेंशनर्स से कई बड़े वादे किए थे, जिनमें ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली, समय पर वेतन और पेंशन का भुगतान, लंबित महंगाई भत्ते की किस्तें जारी करना और मेडिकल बिलों को बिना देरी चुकाने की बात कही गई थी। लेकिन अब सरकार के कार्यकाल को अच्छा-खासा समय बीत जाने के बाद भी कानूनी और वित्तीय स्तर पर कोई स्पष्ट और ठोस निर्णय नजर नहीं आ रहा है।
पेंशनर्स ने बताया कि उन्हें कई महीनों से मेडिकल बिलों का भुगतान नहीं मिल पा रहा है, जिससे बुजुर्गों के इलाज में परेशानी बढ़ रही है। कई कर्मचारियों ने शिकायत की कि उनके एरियर अब भी लंबित हैं और बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद समाधान नहीं हो रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ‘हिमकेयर’ जैसी स्वास्थ्य योजनाओं को कमजोर किया जा रहा है, जिससे हजारों परिवारों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि विधानसभा के चल रहे शीतकालीन सत्र में जब उन्होंने अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की, तो कार्यक्रम स्थल में बदलाव करके उन्हें मुख्य सत्र स्थल से दूर कर दिया गया। इसके कारण कर्मचारियों में असंतोष और भी ज्यादा बढ़ गया है। उनका कहना था कि यह कदम सरकार की कमजोर नीयत और कर्मचारियों के मुद्दों से बचने की रणनीति को दर्शाता है।
सभा के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि यह संघर्ष किसी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं, बल्कि कर्मचारियों और पेंशनर्स के अधिकारों की लड़ाई है। घनश्याम शर्मा ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि अगर जल्द ही लंबित डीए, वेतन, पेंशन, एरियर और मेडिकल बिलों के भुगतान पर ठोस फैसला नहीं लिया गया और ओपीएस को लेकर स्पष्ट नीति सामने नहीं आई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसके तहत जिला मुख्यालयों पर धरना, सचिवालय घेराव और राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं।
उन्होंने सभी कर्मचारियों और पेंशनर्स से अपील की कि वे एकजुट रहें, अनुशासन बनाए रखें और अपने हक के लिए शांतिपूर्ण लेकिन मजबूत तरीके से संघर्ष जारी रखें। सभा के अंत में एक प्रस्ताव पारित कर सरकार को ज्ञापन भेजने का भी निर्णय लिया गया, ताकि उनकी मांगों को औपचारिक रूप से दर्ज कराया जा सके।
यह प्रदर्शन आने वाले समय में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाले संवाद की दिशा और गति को तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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