Post by : Ram Chandar
रंगस: (हमीरपुर) ब्यास नदी के किनारे बाढ़ के पानी से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हिमाचल प्रदेश के जल शक्ति विभाग ने सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य औपचारिक रूप से शुरू कर दिया है। यह दीवार लगभग एक किलोमीटर लंबी होगी और इसके निर्माण पर कुल 6.79 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। विभाग का लक्ष्य है कि यह परियोजना इस वर्ष के अंत तक पूरी तरह से पूरी कर ली जाए, ताकि आने वाले मानसून में ब्यास नदी के बढ़ते पानी से स्थानीय लोगों और सरकारी संपत्ति को किसी भी तरह का नुकसान न हो।
स्थानीय लोगों ने लंबे समय से जल शक्ति विभाग से आग्रह किया था कि ब्यास नदी के किनारे सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जाए, क्योंकि हर साल बरसात के दौरान नदी का जल स्तर बढ़ जाता है और इससे विभाग और आसपास के इलाकों की निजी संपत्ति को गंभीर नुकसान पहुंचता है। उनकी इस मांग पर कार्रवाई करते हुए नादौन उपमंडल के सहायक अभियंता अमित चौधरी ने बताया कि ब्यास नदी के पुल से लेकर कोहला क्षेत्र तक सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि दीवार के निर्माण में उच्च गुणवत्ता की सामग्री और आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे यह दीवार लंबे समय तक प्रभावी और स्थायी सुरक्षा प्रदान कर सके।
इस सुरक्षा दीवार के निर्माण से न केवल बाढ़ के पानी को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, बल्कि जल शक्ति विभाग की मशीनरी, नदियों के किनारे बने संरचनात्मक संसाधनों और स्थानीय लोगों की संपत्ति भी सुरक्षित रहेगी। परियोजना का उद्देश्य ब्यास नदी के किनारे आने वाले हर मानसून में संभावित आपदाओं से बचाव सुनिश्चित करना है।
इसके अलावा, यह परियोजना क्षेत्रवासियों के लिए बाढ़ सुरक्षा और जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। स्थानीय लोग अब सुरक्षा दीवार के निर्माण से अपने जीवन और संपत्ति की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त हैं। जल शक्ति विभाग ने कहा है कि निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग से सुरक्षा मानकों और समय सीमा का सख्ती से पालन किया जाएगा।
इस दीवार के निर्माण से क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा के साथ-साथ जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इसी तरह की और परियोजनाओं के माध्यम से हिमाचल प्रदेश में बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम किया जाएगा।
यह परियोजना न केवल तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय समुदाय और प्रशासन के बीच सामूहिक प्रयास और सहयोग का प्रतीक भी है। इस दीवार के निर्माण से ब्यास नदी के किनारे बसे लोगों की सुरक्षा और जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद है।
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