चैल अभ्यारण्य में पहली बार दिखा इंडियन रोलर, कैमरे में तस्वीर कैद
चैल अभ्यारण्य में पहली बार दिखा इंडियन रोलर, कैमरे में तस्वीर कैद

Post by : Himachal Bureau

Aug. 24, 2026 10:45 a.m. 121

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले स्थित चैल वन्यजीव अभ्यारण्य से वन्यजीव प्रेमियों और पक्षी विशेषज्ञों के लिए बेहद खास खबर सामने आई है। अभ्यारण्य में पहली बार Indian Roller यानी नीलकंठ की मौजूदगी दर्ज की गई है। वन्यजीव निगरानी के दौरान इस खूबसूरत पक्षी को देखा गया और उसकी तस्वीरें कैमरे में भी कैद की गईं। चैल वन्यजीव अभ्यारण्य में इस पक्षी का पहली बार दर्ज होना क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास बात यह है कि चैल अभ्यारण्य करीब 2,100 से 2,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जबकि नीलकंठ को सामान्य तौर पर मैदानी और अपेक्षाकृत कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में देखा जाता है।

नीले और फिरोजी पंखों से होती है पहचान

नीलकंठ अपने आकर्षक रंग-बिरंगे पंखों के लिए जाना जाता है। इसके पंखों में दिखाई देने वाला नीला और फिरोजी रंग इसे दूसरे पक्षियों से अलग पहचान देता है। उड़ान के दौरान इसके चमकीले पंख और भी स्पष्ट नजर आते हैं। यह पक्षी आमतौर पर खुले क्षेत्रों, घास के मैदानों, कृषि भूमि और कम ऊंचाई वाले इलाकों में रहना पसंद करता है। इसे पेड़ों, बिजली के तारों या ऊंची जगहों पर बैठकर आसपास शिकार तलाशते हुए देखा जाता है। यह मुख्य रूप से कीड़े-मकोड़ों और छोटे जीवों को भोजन के रूप में ग्रहण करता है।

चैल में रिकॉर्ड होना क्यों है खास?

विशेषज्ञों के अनुसार, चैल जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्र में नीलकंठ का दिखाई देना सामान्य घटना नहीं है। हिमाचल प्रदेश के अन्य हिस्सों में इस पक्षी के असामान्य रिकॉर्ड पहले भी सामने आ चुके हैं। वर्ष 2014 में सांगला और वर्ष 2023 में काजा जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी इसके देखे जाने की जानकारी मिली थी। हालांकि चैल वन्यजीव अभ्यारण्य से इस प्रजाति की मौजूदगी का पहले कोई ज्ञात रिकॉर्ड सामने नहीं आया था। इसलिए यहां नीलकंठ की तस्वीर कैमरे में कैद होना क्षेत्र के पक्षी अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पक्षियों की विविधता को समझने में मिलेगी मदद

चैल में Indian Roller की मौजूदगी सामने आने से अभ्यारण्य में दर्ज पक्षियों की विविधता से जुड़ी जानकारी में भी इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के रिकॉर्ड से पक्षियों के आवास, मौसमी आवाजाही और उनके फैलाव को समझने में सहायता मिलती है। लगातार निगरानी से यह भी पता लगाया जा सकता है कि बदलते मौसम और पर्यावरणीय परिस्थितियों का पक्षियों की आवाजाही पर किस तरह असर पड़ रहा है। ऐसे आंकड़े भविष्य में वन्यजीव संरक्षण की योजनाएं तैयार करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

नियमित निगरानी पर विशेषज्ञों का जोर

पक्षी विशेषज्ञों और वन्यजीव अधिकारियों ने हिमालयी क्षेत्रों में लगातार क्षेत्रीय निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया है। प्रवास के दौरान पक्षी कई बार ऐसे स्थानों तक पहुंच जाते हैं, जहां उनकी मौजूदगी पहले दर्ज नहीं हुई होती। ऐसे में नियमित सर्वेक्षण और तस्वीरों के माध्यम से दस्तावेजीकरण वैज्ञानिकों को पक्षियों की गतिविधियों को समझने में मदद करता है। नागरिक विज्ञान और स्थानीय पक्षी प्रेमियों की भागीदारी भी इस काम को मजबूत बना सकती है।

Read Also: थाईलैंड में चुराह के राजेश कुमार ने पावरलिफ्टिंग में जीता स्वर्ण पदक

वन विभाग की टीम को मिली सराहना

चैल अभ्यारण्य में इस महत्वपूर्ण रिकॉर्ड के सामने आने पर वन विभाग की टीम को भी सराहना मिली है। वन्यजीवों की नियमित निगरानी से अभ्यारण्य में मौजूद प्रजातियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलती है। चैल में नीलकंठ का दिखाई देना यह भी दर्शाता है कि हिमाचल प्रदेश की जैव विविधता अभी कई ऐसे पहलुओं को अपने भीतर समेटे हुए है, जिनका वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण लगातार किया जाना जरूरी है।

चैल में इंडियन रोलर दिखना क्यों महत्वपूर्ण है?

चैल वन्यजीव अभ्यारण्य में नीलकंठ का पहला ज्ञात रिकॉर्ड इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पक्षी सामान्यतः कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाया जाता है। इसकी मौजूदगी से हिमाचल में पक्षियों के आवास और आवाजाही से जुड़ी नई जानकारी सामने आ सकती है।

#शिमला #ब्रेकिंग न्यूज़ #ताज़ा खबरें #भारत समाचार #भारतीय खबरें
अनुच्छेद
प्रायोजित
ट्रेंडिंग खबरें
चैल अभ्यारण्य में पहली बार दिखा इंडियन रोलर, कैमरे में तस्वीर कैद पंजाब बंद आज: मोहाली-चंडीगढ़ में स्कूल बंद, यातायात पर असर मणिमहेश यात्रा के लिए 25 अगस्त से शुरू होगी हेलिकॉप्टर सेवा शुभमन गिल के पास श्रीलंका टेस्ट में इतिहास रचने का मौका मणिमहेश यात्रा 2026: पंजीकरण जरूरी, प्लास्टिक और तंबाकू पर रोक मां आशापुरी मंदिर का इतिहास, पांडवों से जुड़ी हैं कई मान्यताएं चंबा मिंजर मेला समापन समारोह में CM सुक्खू करेंगे अध्यक्षता, कई सौगातें किन्नर कैलाश यात्रा शुरू, पहले दिन 115 श्रद्धालुओं ने किया पवित्र प्रस्थान