बाबा ख्वाजा पीर मंदिर के दंगल में मंत्री यादविंद्र गोमा ने दिया संस्कृति का संदेश
बाबा ख्वाजा पीर मंदिर के दंगल में मंत्री यादविंद्र गोमा ने दिया संस्कृति का संदेश

Author : Rajesh Vyas

March 3, 2026 11:21 a.m. 108

आलमपुर में बाबा ख्वाजा पीर मंदिर के वार्षिक दंगल का आयोजन इस वर्ष बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया। इस अवसर पर आयुष, युवा सेवाएँ एवं खेल मंत्री यादविंद्र गोमा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मेले और उत्सव हमारी संस्कृति के सच्चे परिचायक होते हैं। ये आयोजन स्थानीय देवी-देवताओं के प्रति लोगों की अटूट आस्था, कृतज्ञता और धार्मिक विश्वास को प्रकट करते हैं। साथ ही, ऐसे अवसर समाज में आपसी भाईचारे, प्रेम और सौहार्द की भावना को मजबूत करते हैं।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होने वाले मेले और दंगल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होते, बल्कि ये हमारी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का कार्य करते हैं। इन आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।

मंत्री ने आयोजन समिति को सफल कार्यक्रम के लिए बधाई देते हुए कहा कि बाबा ख्वाजा पीर मंदिर एक ऐतिहासिक और पावन धार्मिक स्थल है। यहां आयोजित होने वाले दंगल का अपना विशेष और प्राचीन महत्व है। वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है और हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक इस आयोजन में भाग लेते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को एकजुट करने का कार्य करते हैं। यह केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का प्रतीक है। दंगल के माध्यम से युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरणा मिलती है और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होती है।

यादविंद्र गोमा ने अपने संबोधन में प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार राज्य की गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार का उद्देश्य है कि आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं से जुड़ी रहें।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित होने वाले पारंपरिक मेले, उत्सव और खेल प्रतियोगिताएं हमारी पहचान हैं। सरकार इन आयोजनों को प्रोत्साहित कर रही है ताकि ग्रामीण संस्कृति और परंपराएं सुरक्षित रह सकें।

मंत्री ने आलमपुर क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि आलमपुर में आयुर्वेद अस्पताल के निर्माण के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। संबंधित विभागीय औपचारिकताएं पूरी होते ही जल्द ही अस्पताल का शिलान्यास किया जाएगा। इससे क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।

इसके अलावा उन्होंने बताया कि आलमपुर कांगड़ा जिले की सीमा पर स्थित है और यहां जिला कांगड़ा के प्रवेश द्वार का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना पर लगभग 50 लाख रुपये व्यय किए जाएंगे। इस प्रवेश द्वार के निर्माण से क्षेत्र की पहचान और सौंदर्य में वृद्धि होगी। मंत्री ने मेला कमेटी को सफल आयोजन के लिए 31 हजार रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि समिति ने कार्यक्रम को सुचारू रूप से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

दंगल प्रतियोगिता के दौरान माली विजेता बिलू को 31 हजार रुपये और उपविजेता गिंदर को 21 हजार रुपये की धनराशि देकर सम्मानित किया गया। मंत्री ने दोनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि खेल युवाओं के जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की भावना विकसित करते हैं।

इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति और अधिकारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जसवंत डढवाल, नायब तहसीलदार राजीव शर्मा, बीडीओ लंबागांव सिकंदर कुमार, दंगल समिति के प्रधान कपिल सिपहिया, सचिव सुरेंद्र राणा, उप प्रधान बिहारी लाल, पूर्व प्रधान आलमपुर राजेंद्र बलिया, पूर्व प्रधान सकोह सुशील शर्मा सहित विभिन्न पंचायत प्रतिनिधि और विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और श्रद्धालु भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

आलमपुर में आयोजित बाबा ख्वाजा पीर मंदिर का वार्षिक दंगल धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया। मंत्री के संबोधन और विकास संबंधी घोषणाओं ने क्षेत्रवासियों में नई उम्मीद जगाई। यह आयोजन न केवल खेल और मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि समाज में भाईचारे और मेल-मिलाप का संदेश भी देकर गया।

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