SDM ओशीन शर्मा ने सोशल मीडिया अकाउंट डिएक्टिवेट किया, ब्रांड विवाद पर जांच
SDM ओशीन शर्मा ने सोशल मीडिया अकाउंट डिएक्टिवेट किया, ब्रांड विवाद पर जांच

Post by : Himachal Bureau

March 2, 2026 6:01 p.m. 1498

शिमला अर्बन में तैनात हिमाचल प्रदेश की चर्चित महिला अधिकारी और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर SDM ओशीन शर्मा ने अचानक अपने सभी प्रमुख सोशल मीडिया अकाउंट अस्थायी रूप से डिएक्टिवेट कर दिए हैं। इस कदम ने उनके समर्थकों, फॉलोअर्स और आलोचकों को हैरान कर दिया है। 32 वर्षीय ओशीन शर्मा सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय और लोकप्रिय रही हैं। उनके इंस्टाग्राम पर लगभग 3.74 लाख, फेसबुक पर 3.71 लाख, (ट्विटर) पर एक लाख से अधिक और YouTube पर करीब 65 हजार सब्सक्राइबर थे। कुल मिलाकर उनके फॉलोअर्स की संख्या नौ लाख से ऊपर पहुँच चुकी थी।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब ओशीन शर्मा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक फिटनेस प्रोडक्ट से जुड़े वीडियो साझा किए। इस वीडियो को लेकर सवाल उठने लगे कि एक कार्यरत प्रशासनिक अधिकारी द्वारा किसी निजी उत्पाद का प्रचार करना क्या सेवा आचार संहिता के अनुरूप है या नहीं। ओशीन शर्मा ने स्पष्ट किया कि वे पिछले एक वर्ष से उस उत्पाद का व्यक्तिगत रूप से उपयोग कर रही थीं और उसी अनुभव के आधार पर वीडियो साझा किया था। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का व्यावसायिक प्रमोशन नहीं था।

हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से कुछ कंटेंट हटाने की मौखिक सलाह मिलने के बाद उन्होंने अपने सभी अकाउंट अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया। ओशीन शर्मा ने यह भी कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई औपचारिक नोटिस नहीं मिला है।

सूत्रों के अनुसार, मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने इस प्रकरण में DC शिमला को जांच के निर्देश दिए हैं। हालांकि, नोटिस जारी करने के सवाल पर मुख्य सचिव ने कोई टिप्पणी करने से परहेज किया और कहा कि मामले में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

ओशीन शर्मा इससे पहले भी विभिन्न कारणों से सुर्खियों में रही हैं। उनकी शादी धर्मशाला के पूर्व भाजपा विधायक विशाल नेहरिया से हुई थी, जो बाद में टूट गई। इसके अलावा, मंडी के संधोल में तहसीलदार रहते हुए लंबित कार्यों को लेकर उन्हें नोटिस मिला था और बाद में उनका तबादला कर दिया गया। कुछ समय तक उन्हें नई पोस्टिंग नहीं मिली, फिर भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग में तैनाती हुई और वर्तमान में वे शिमला अर्बन में SDM के रूप में कार्यरत हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी अधिकारियों की सोशल मीडिया गतिविधियों की सीमा क्या होनी चाहिए, क्या व्यक्तिगत अनुभव साझा करना भी प्रमोशन माना जाएगा और क्या पब्लिक इंट्रेस्ट की कसौटी पर ऐसे पोस्ट सही ठहराए जा सकते हैं।

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