Post by : Khushi Joshi
डिजिटल युग में तकनीक अब केवल सुविधा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि मानव जीवन बचाने का सशक्त माध्यम बनती जा रही है। हिमाचल प्रदेश के सोलन में स्थित शूलिनी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने चिकित्सा और तकनीक के क्षेत्र में ऐसा काम किया है, जो आने वाले समय में लाखों महिलाओं के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है। विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर आधारित एक ऐसा उन्नत मॉडल विकसित किया है, जिसकी मदद से ब्रेस्ट कैंसर की पहचान अब सिर्फ एक क्लिक में संभव हो सकेगी।
यह अत्याधुनिक तकनीक ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की पहचान 88 से 99.6 प्रतिशत तक की सटीकता के साथ कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और सही निदान ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली मौतों को काफी हद तक कम कर सकता है। ऐसे में यह शोध महिलाओं के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक शोध का नेतृत्व शूलिनी यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गौरव गुप्ता ने किया है।
इस शोध परियोजना में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. भारती ठाकुर, रिसर्च स्कॉलर डॉ. शिवानी भारद्वाज और अंतरराष्ट्रीय छात्र अब्दुल्लाही मोहम्मद भी शामिल रहे। टीम ने एक उन्नत एन्सेंबल मशीन लर्निंग मॉडल तैयार किया है, जिसमें सपोर्ट वेक्टर मशीन, लॉजिस्टिक रिग्रेशन और के-नियरेस्ट नेबर्स जैसे आधुनिक एल्गोरिदम का संयोजन किया गया है। इस मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए एक लाख से अधिक सीटी स्कैन और मेडिकल डाटा का विश्लेषण किया गया, जिसमें मरीजों की क्लीनिकल और जेनेटिक जानकारियां भी शामिल थीं।
डाटा की गुणवत्ता और प्रोसेसिंग को बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने प्रिंसिपल कंपोनेंट एनालिसिस और नेबर्स कंपोनेंट एनालिसिस जैसी तकनीकों का उपयोग किया। इसके बाद किए गए व्यापक परीक्षण और क्रॉस-वेरिफिकेशन में मॉडल ने बेहद प्रभावशाली परिणाम दिए। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तकनीक की सबसे बड़ी ताकत इसकी कम लागत और तेज़ परिणाम हैं, जिससे यह सुविधा बड़े शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी आसानी से उपलब्ध कराई जा सकती है।
हिमाचल प्रदेश में ब्रेस्ट कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जो महिला स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 में प्रदेश में ब्रेस्ट कैंसर के नए मामलों की संख्या करीब 1310 थी, जो वर्ष 2023 तक बढ़कर लगभग 1437 हो गई। विशेषज्ञों के मुताबिक यह बीमारी प्रदेश में महिलाओं के कुल कैंसर मामलों का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा बन चुकी है। हर साल सैकड़ों महिलाएं इसकी चपेट में आ रही हैं, जिनमें से कई मामलों में देर से पहचान जानलेवा साबित होती है।
ऐसे में शूलिनी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह AI मॉडल महिलाओं के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि भविष्य में इस तकनीक को अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों से जोड़ा जा सकता है, जिससे समय पर जांच संभव हो सकेगी और इलाज की सफलता दर भी बढ़ेगी। हिमाचल के इस वैज्ञानिक प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि छोटे पहाड़ी राज्य भी वैश्विक स्तर की खोज और नवाचार में अहम भूमिका निभा सकते हैं
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