Post by : Shivani Kumari
क्रांति गौड़ मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के आदिवासी बहुल गांव घुवारा की रहने वाली हैं। उनका जन्म और पालन-पोषण ऐसे परिवार में हुआ जहाँ आर्थिक स्थिति कमजोर थी। उनके पिता, मुन्ना सिंह गौड़, जो पुलिस कांस्टेबल थे, 2012 में चुनाव ड्यूटी के दौरान कथित लापरवाही के आरोप में निलंबित हो गए, जिससे परिवार को आर्थिक और सामाजिक रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बड़े भाई मजदूरी करते और बस कंडक्टर की नौकरी कर घर की जिम्मेदारियां निभाते थे। इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद क्रांति ने सपना देखा और क्रिकेट के प्रति अपने जुनून को बनाए रखा।
उनके गांव में खेल सुविधाएं कम थीं, लेकिन कोच राजीव बिरथरे ने उन्हें देखा और नि:शुल्क प्रशिक्षण देना शुरू किया। कोच ने उनकी फीस माफ की और आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाए। स्थानीय क्रिकेट संघ के सहयोग से उन्होंने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित की। 2024-25 में मध्य प्रदेश महिला क्रिकेट टीम की ओर से वन-डे ट्रॉफी जीत में क्रांति का अहम योगदान रहा। इसी सफल प्रदर्शन के बाद वे महिला प्रीमियर लीग की टीम यूपी वारियर्स में स्थान पाने में सफल रहीं।
क्रांति का राष्ट्रीय टीम में पदार्पण श्रीलंका में हुई त्रि-राष्ट्र श्रृंखला में हुआ। इंग्लैंड दौरे पर भी उन्होंने अपनी बेहतरीन गेंदबाजी से टीम को मजबूती दी। विश्व कप 2025 में उन्होंने 9 विकेट लिए, जिसमें पाकिस्तान के खिलाफ उनका प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय था। इस विश्व कप में भारत ने 47 वर्षों के बाद महिला क्रिकेट का विश्व कप जीता।
इस उपलब्धि के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने क्रांति गौड़ को एक करोड़ रुपये नकद पुरस्कार और स्वर्ण पदक से सम्मानित किया। उन्होंने परिवार की मुश्किलों को समझते हुए क्रांति के पिता की सेवा बहाली के लिए राज्य सरकार से उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही छतरपुर जिले में नया क्रिकेट स्टेडियम तैयार करने की घोषणा की गई, जो स्थानीय खिलाड़ियों के लिए बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। जनजातीय गौरव दिवस पर भी क्रांति को विशेष अतिथि के रूप में सम्मानित किया जाएगा।
क्रांति गौड़ की कहानी न केवल उनके जीवन में आई चुनौतियों का सामना करने और उन्हें पार करने की है, बल्कि यह उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं। उनकी सफलता ने आदिवासी क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं के लिए नई उम्मीद जगाई है। यह लेख पूरी तरह से शुद्ध हिंदी में है और हिंदी भाषी पाठकों के लिए सरल, सटीक और प्रेरणादायक भाषा में तैयार किया गया है। यदि आवश्यक हो तो इसे 9000 शब्दों में विस्तृत रूप में भी प्रस्तुत किया जा सकता है।
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