ईरान युद्ध में बड़ा मोड़, ट्रंप तैयार युद्ध खत्म करने को, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी बंद
ईरान युद्ध में बड़ा मोड़, ट्रंप तैयार युद्ध खत्म करने को, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी बंद

Post by : Himachal Bureau

March 31, 2026 11:49 a.m. 168

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई को समाप्त करने के लिए तैयार हैं, भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला न हो। यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में उन्होंने ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर उसने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को नहीं खोला तो अमेरिका उसके पावर प्लांट्स को पूरी तरह नष्ट कर सकता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का ऑपरेशन बहुत जटिल और लंबा हो सकता है, जिसे वह फिलहाल टालना चाहते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि इस तरह के बड़े ऑपरेशन को बाद के समय के लिए छोड़ा जा सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के लगभग 20 से 25 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है।

भारत जैसे देशों के लिए इसकी अहमियत और भी अधिक है, क्योंकि भारत अपनी लगभग 80 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर है। ऐसे में इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है और तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

ईरान द्वारा इस मार्ग को बंद करने के बाद सैकड़ों जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। इसमें कंटेनर शिप, ड्राई कार्गो और तेल टैंकर शामिल हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी गहरा असर पड़ा है।

युद्ध की शुरुआत और बढ़ता सैन्य टकराव

इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई शहरों पर हवाई हमले किए। इस ऑपरेशन को ‘Operation Epic Fury’ नाम दिया गया था।

इन हमलों में ईरान के कई बड़े सैन्य और राजनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में ईरान के शीर्ष नेता Ayatollah Ali Khamenei की भी मौत हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया।

इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी और खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में हमले किए। दुबई, कुवैत, अबू धाबी, कतर और बहरीन जैसे क्षेत्रों को भी इन हमलों का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने यह तय किया है कि अमेरिका को अपने मुख्य सैन्य लक्ष्यों पर ध्यान देना चाहिए। इसमें ईरान की नौसेना को कमजोर करना और उसके मिसाइल भंडार को नष्ट करना शामिल है।

ट्रंप का मानना है कि अगर ये लक्ष्य हासिल हो जाते हैं, तो अमेरिका को युद्ध को धीरे-धीरे समाप्त कर देना चाहिए और कूटनीतिक दबाव के जरिए ईरान को व्यापार के लिए रास्ते खोलने के लिए मजबूर करना चाहिए।

अगर कूटनीति से बात नहीं बनती है, तो अमेरिका अपने यूरोपीय और खाड़ी सहयोगियों पर दबाव डाल सकता है कि वे इस जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की जिम्मेदारी लें।

वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर असर

होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक व्यापार पर गहरा असर पड़ा है। यह मार्ग न केवल तेल बल्कि अन्य महत्वपूर्ण सामानों के लिए भी बेहद जरूरी है।

इस मार्ग के बंद होने से तेल की सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है, खासकर उन देशों में जो आयातित ऊर्जा पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती है।

 अरब देशों से युद्ध का खर्च उठाने की बात

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ट्रंप चाहते हैं कि अरब देश ईरान के खिलाफ युद्ध का खर्च उठाने में मदद करें।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह विचार अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन आने वाले समय में इस पर और स्पष्ट बयान सामने आ सकते हैं।

अगर ऐसा होता है, तो यह मिडिल ईस्ट की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। वर्तमान स्थिति बेहद जटिल बनी हुई है। एक तरफ अमेरिका सैन्य कार्रवाई को सीमित करना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ ईरान अपने रुख पर कायम है। होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा अभी भी सबसे बड़ा संकट बना हुआ है। अगर इसे जल्द नहीं खोला गया, तो वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और व्यापार दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट का समाधान केवल कूटनीति और बातचीत के जरिए ही संभव है। अगर दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर नहीं आते हैं, तो यह संघर्ष और भी लंबा खिंच सकता है और इसके परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं।

 इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि यह सिर्फ एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है या यह संघर्ष और भी गहरा जाता है।

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