Post by : Shivani Kumari
फ्रांस वर्तमान में अपने सबसे गंभीर राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू को पुनः नियुक्त किया है, जिन्होंने हाल ही में इस्तीफा दिया था। यह कदम सरकार को स्थिर करने और 2026 के बजट को संसद में पास कराने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी दलों के लगातार दबाव और अविश्वास प्रस्तावों के बीच, मैक्रों ने अपने पद पर बने रहने का संकल्प जताया है।
जून 2024 में हुई संसद की चुनावों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिससे राष्ट्रीय असेंबली में विभाजन पैदा हुआ। इससे पहले बर्नियर और बायरो की सरकारें बजट विवादों के कारण असफल रही थीं। लेकोर्नू का पहला कार्यकाल केवल 14 घंटे चला, जिसके बाद उन्हें पुनः प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया।
लेकोर्नू ने नए 35-सदस्यीय मंत्रिमंडल की घोषणा की है, जिसमें प्रमुख नाम हैं:
रोलां लेस्क्यूर: वित्त मंत्री के रूप में पुनः नियुक्त, बजटीय नीतियों की निरंतरता के लिए।
लॉरेंट नुनेज़: गृह मंत्री, पहले पेरिस पुलिस प्रमुख।
कैथरीन वॉट्रिन: रक्षा मंत्री।
मंत्रिमंडल का मुख्य उद्देश्य 2026 का बजट संसद में प्रस्तुत करना है, जिसमें 5.4% जीडीपी की अनुमानित कमी को पूरा करना है। लेकोर्नू ने 4.7%-5% की कमी का लक्ष्य प्रस्तावित किया है ताकि विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि लेकोर्नू की पुनः नियुक्ति मैक्रों की यह रणनीति है कि वे कार्यकारी शाखा पर नियंत्रण बनाए रखें। हालांकि, सरकार का जीवित रहना विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी के समर्थन पर निर्भर करता है, जिन्होंने पेंशन सुधारों को रद्द करने और अरबपतियों पर कर लगाने की मांग की है।
जनता की प्रतिक्रिया विभाजित है। कुछ लोग मैक्रों की सरकार स्थिर करने की प्रतिबद्धता का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य मौजूदा राजनीतिक बदलाव की कमी की आलोचना कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, फ्रांस के राजनीतिक विकास को कड़ी निगरानी में रखा गया है क्योंकि इसकी स्थिरता यूरोपीय संघ और वैश्विक बाजारों के लिए महत्वपूर्ण है।
राजनीतिक अस्थिरता का अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है, निवेशकों में अनिश्चितता और देश की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता बढ़ रही है। यदि बजट पास नहीं होता है, तो आर्थिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं और फ्रांस का यूरोपीय संघ में प्रभाव कमजोर हो सकता है। इसके अलावा, लगातार राजनीतिक उथल-पुथल से नागरिकों का सरकारी संस्थाओं पर भरोसा कम हो सकता है।
जैसा कि फ्रांस 13 अक्टूबर की तारीख के करीब पहुँच रहा है, 2026 का बजट पास कराना सरकार की क्षमता का मुख्य परीक्षा बन जाएगा। आगामी अविश्वास वोट और समाजवादी पार्टी की भूमिका सरकार के भविष्य और फ्रांस की राजनीतिक दिशा को तय करेगी।
आर्टिकल्स व अनुशंसित आंतरिक लिंकिंग:
फ्रांस के राजनीतिक संकट में मैक्रों का डटा हुआ रुख
फ्रांस की राजनीति व बजट संकट — दुनियाभर के असर के लिए लिंक करें:
नोबेल शांति पुरस्कार 2025 (आंतरराष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक प्रतिक्रिया)
भारत में नए आर्थिक सुधार (अंतरराष्ट्रीय आर्थिक समझ)
चांजू नाला भूस्खलन से चंबा-तीसा मार्ग 12 घंटे रहा बंद...
भारी बारिश के बीच landslide से Chamba-Tissa road पर ट्रैफिक ठप रहा, PWD टीम ने JCB मशीन से मलबा हटाक
सरकाघाट में आतंक मचाने वाला खूंखार तेंदुआ आखिरकार पकड़ा गया...
मंडी के सरकाघाट क्षेत्र में वन विभाग की special wildlife टीम ने 2 घंटे के rescue operation के बाद हम
शाहपुर में सौर ऊर्जा परियोजना को मंजूरी, दो करोड़ से बनेगा प...
Kangra Shahpur के Gubbar गांव में 500 KW solar plant लगेगा, renewable energy को बढ़ावा मिलेगा, सरकार
आय घटने से निगम पर बढ़ा आर्थिक दबाव चार करोड़ की कमी...
Shimla Municipal Corporation का budget अब Property Tax और Garbage Fee पर निर्भर, building map और com
जाहू उपतहसील में फोटोस्टैट सेवाओं के लिए निविदाएं आमंत्रित...
Hamirpur Bhoranj के Jahu उपतहसील परिसर में photocopy services के लिए 6 फरवरी तक sealed tender जमा कर
कुठार में अवैध निर्माण पर टीसीपी विभाग की कार्रवाई नोटिस जार...
Hamirpur Nadaun के Kuthar क्षेत्र में TCP rules तोड़कर निर्माण करने पर व्यक्ति को notice, illegal co
कीमती धातुओं में जोरदार उछाल सोना-चांदी ने बनाया नया रिकॉर्ड...
MCX Market में Gold और Silver की कीमतों में तेज बढ़ोतरी investors की safe investment में बढ़ी रुचि ज