शिमला में 75 वर्षीय पत्नियों के तलाक के अनोखे मामले, कोर्ट ने दी मंजूरी
शिमला में 75 वर्षीय पत्नियों के तलाक के अनोखे मामले, कोर्ट ने दी मंजूरी

Post by : Himachal Bureau

March 30, 2026 1:34 p.m. 278

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के ठियोग क्षेत्र से एक बेहद अनोखा और चर्चा में रहने वाला मामला सामने आया है। यहां दो अलग-अलग वैवाहिक मामलों में अदालत ने आपसी सहमति और शपथ पत्रों के आधार पर तलाक को मंजूरी दी। खास बात यह है कि इन मामलों में दोनों महिलाओं की उम्र 75 वर्ष बताई गई है। यह घटनाक्रम न केवल सामाजिक दृष्टि से बल्कि कानूनी दृष्टि से भी काफी दिलचस्प है और इसे महिलाओं के अधिकार और सम्मानजनक तरीके से विवाह समाप्त करने का एक उदाहरण माना जा रहा है।

पहला मामला: 1990 में विवाह, 15 सालों से अनबन

पहले मामले में पति-पत्नी ने 1990 में विवाह किया था। पिछले करीब 15 वर्षों से उनके बीच अनबन चल रही थी और वे अलग रह रहे थे। इस अवधि के दौरान कई बार आपसी समझौते की कोशिशें की गईं, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। अंततः उन्होंने अदालत में संयुक्त याचिका दाखिल की और आपसी सहमति के आधार पर वैवाहिक संबंध समाप्त करने का अनुरोध किया। अदालत ने तलाक को मंजूरी देते हुए पति को आदेश दिया कि वह अपनी मासिक पेंशन में से 5,000 रुपये प्रति माह पूर्व पत्नी को भरण-पोषण के लिए दे। इसके अलावा, किसी भी बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च भी पति ही वहन करेगा।

दूसरा मामला: 2008 में विवाह, तीन बच्चों की कस्टडी

दूसरे मामले में 75 वर्षीय पत्नी और 39 वर्षीय पति का विवाह वर्ष 2008 में हुआ था। उनके तीन बच्चे हैं। गंभीर मतभेद और अलग रहने की अनिच्छा के कारण दोनों ने अदालत से तलाक की मांग की। अदालत ने समझौते के अनुसार निर्णय दिया कि तीनों बच्चे अपने पिता के साथ रहेंगे, लेकिन मां को यह अधिकार होगा कि वह जब चाहे अपने बच्चों से मिल सकें। अदालत ने यहां भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाया और महिलाओं के रहने और बुनियादी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा।

दोनों मामलों में अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि तलाक के बाद महिलाओं के अधिकार सुरक्षित रहें। कोर्ट ने आदेश दिया कि पूर्व पतियों को अपनी तलाकशुदा पत्नियों के लिए अलग कमरा, रसोई और वॉशरूम की सुविधा उपलब्ध करानी होगी। यह कदम आपसी सम्मान और कानून के प्रति जागरूकता का उदाहरण है।

इन दोनों मामलों ने सामाजिक और कानूनी हलकों में काफी चर्चा पैदा की है। आपसी सहमति और सम्मानजनक शर्तों के साथ विवाह समाप्त करना अब एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल वृद्ध महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि समाज में समानता और न्याय के दृष्टिकोण को भी मजबूत करता है।

#शिमला #हिमाचल प्रदेश #ताज़ा खबरें #भारत समाचार
अनुच्छेद
प्रायोजित
ट्रेंडिंग खबरें
हिमाचल के युवा खिलाड़ी आर्यन परमार ने पैरा कबड्डी में गोल्ड जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया IGMC शिमला में न्यूक्लियर मेडिसिन ब्लॉक का उद्घाटन, अब PET Scan से कैंसर की जल्द पहचान होगी आईएचएम हमीरपुर के ‘उड़ान-2026’ वार्षिक समारोह में मेधावी छात्रों को किया गया सम्मानित सुजानपुर में सिक्योरिटी गार्ड और सुपरवाइजर पदों के लिए 10 अप्रैल को साक्षात्कार AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटाया, अशोक मित्तल बने नए उपनेता एलपीजी सिलेंडर महंगा, छोटे और कॉमर्शियल गैस के दाम बढ़े, आम लोगों पर बढ़ा बोझ ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान का बड़ा हमला, इजराइल पर दागीं मिसाइलें, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव 50 साल बाद चांद मिशन की बड़ी उड़ान, चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन यान से चंद्रमा की ओर रवाना