AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटाया, अशोक मित्तल बने नए उपनेता
AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटाया, अशोक मित्तल बने नए उपनेता

Post by : Himachal Bureau

April 2, 2026 3:36 p.m. 134

आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा में अपने नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया है। उनकी जगह अब अशोक मित्तल को पार्टी का उपनेता नियुक्त किया गया है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने गुरुवार को यह फैसला लिया और इसके बारे में राज्यसभा को आधिकारिक पत्र भेजा गया। हालांकि राघव चड्ढा सांसद के रूप में सक्रिय रहेंगे और सदन में हिस्सा लेते रहेंगे, लेकिन अब उनकी जिम्मेदारी पहले जैसी नहीं रहेगी।

पिछले कुछ समय से पार्टी के टॉप लीडर्स और राघव चड्ढा को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। दिल्ली शराब मामले में केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जैसे पार्टी के शीर्ष नेता बरी हुए, लेकिन राघव चड्ढा ने उनसे मुलाकात नहीं की और इस पर सोशल मीडिया पर कोई प्रतिक्रिया भी नहीं दी। इस वजह से कहा जा रहा है कि राज्यसभा में उनका कद कम करना पार्टी का स्पष्ट संदेश है।

राज्यसभा में राघव चड्ढा ने कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाने की मांग की और कहा कि बच्चों की परवरिश सिर्फ मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि माता-पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 15 दिन का पितृत्व अवकाश मिलता है, लेकिन निजी क्षेत्र में ऐसा नहीं है। उन्होंने कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कर्मचारियों को लंबा पितृत्व अवकाश मिलता है और भारत में भी इस दिशा में बदलाव जरूरी है।

इसके अलावा, राघव चड्ढा ने न्यूनतम बैलेंस पर बैंक जुर्मानों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल में बैंक सिस्टम ने गरीब और कमजोर लोगों से लगभग 19 हजार करोड़ रुपए जुर्माने के रूप में वसूले। पब्लिक सेक्टर के बैंकों ने 8 हजार करोड़ और प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने 11 हजार करोड़ रुपए वसूले। उन्होंने बताया कि ये जुर्माने अमीरों या बड़े कर्जदारों से नहीं, बल्कि गरीब खाताधारकों से लिए जाते हैं। किसान, पेंशनभोगी और दिहाड़ी मजदूर अक्सर न्यूनतम बैलेंस बनाए नहीं रख पाते, लेकिन उन पर जुर्माना लगाया जाता है।

अब अशोक मित्तल राज्यसभा में पार्टी की रणनीति और सदन में मुद्दों को उठाने की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके नेतृत्व में पार्टी की आवाज राज्यसभा में मजबूत बनेगी, और मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा। वहीं राघव चड्ढा सांसद के रूप में सक्रिय रहेंगे और जनहित के मामलों को आगे भी उठाते रहेंगे।

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