पहाड़ी मटर के बढ़ते दाम और बढ़ती मांग से राजगढ़ के किसानों को मिली आर्थिक राहत
पहाड़ी मटर के बढ़ते दाम और बढ़ती मांग से राजगढ़ के किसानों को मिली आर्थिक राहत

Author : Gopal Dutt Sharma

April 2, 2026 3:45 p.m. 134

सिरमौर जिले के राजगढ़ क्षेत्र की पहाड़ी मटर ने हाल के समय में देशभर की मंडियों में अपनी खास पहचान बना ली है। यह मटर केवल स्थानीय किसानों की फसल नहीं रह गई है, बल्कि अब यह सूरत, अहमदाबाद और मुंबई जैसी बड़ी मंडियों में भी भारी मात्रा में भेजी जा रही है। बढ़ती मांग और अच्छे दामों ने किसानों के चेहरे पर फिर से मुस्कान ला दी है और उन्हें उम्मीद दिखने लगी है कि उनकी मेहनत का सही फल उन्हें मिलेगा।

राजगढ़ क्षेत्र से प्रतिदिन लगभग 700 से 800 बोरी पहाड़ी मटर बड़े शहरों की मंडियों में भेजी जा रही है। इसकी गुणवत्ता और स्वाद के कारण यह मटर बाजार में तेजी से बिक रही है। पिछले कुछ समय तक मटर के दाम बहुत कम होने के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था और लागत निकालना मुश्किल हो गया था। लेकिन अब बाजार में मांग और भावों में आई तेजी ने उनकी स्थिति को बदल दिया है। राजगढ़ मंडी में इस समय मटर 45 से 55 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रही है, जिससे किसानों को अब अपनी फसल का उचित मूल्य मिल रहा है।

राजगढ़ क्षेत्र की कुल 33 पंचायतों में मटर की खेती होती है। क्षेत्र की ऊंचाई के अनुसार अलग-अलग समय पर फसल तैयार होती है, जिससे पूरे सीजन में बाजार में मटर की आपूर्ति लगातार बनी रहती है। लगभग 150 हेक्टेयर क्षेत्र में मटर की खेती होती है और करीब 380 मीट्रिक टन उत्पादन होता है। यह उत्पादन न केवल स्थानीय जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि देशभर की बड़ी मंडियों में भी निर्यात किया जा रहा है।

स्थानीय किसान अब इस बढ़ी हुई मांग से खुश हैं। उनका कहना है कि अगर इसी तरह मटर की मांग बनी रही, तो आने वाले समय में उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले लागत निकालना मुश्किल था और कई किसानों को घाटा झेलना पड़ता था, लेकिन अब भावों में बढ़ोतरी से उन्हें मेहनत का सही फल मिलने लगा है।

कृषि विशेषज्ञ शिवराम का कहना है कि “राजगढ़ की पहाड़ी मटर अपनी गुणवत्ता और स्वाद के कारण देशभर की मंडियों में पसंद की जा रही है। अगर हम इसके विपणन और परिवहन की व्यवस्था को और बेहतर करें, तो यह फसल किसानों की आय बढ़ाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।”

स्पष्ट है कि राजगढ़ की पहाड़ी मटर अब सिर्फ स्थानीय बाजार की फसल नहीं रह गई है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रही है। आने वाले समय में यह न केवल किसानों के लिए आय का मजबूत जरिया बनेगी, बल्कि भारत की कृषि बाजार में राजगढ़ की मटर की खास पहचान को और मजबूत करेगी।

किसानों के लिए यह समय बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि अच्छी गुणवत्ता वाली मटर और बढ़ती मांग ने उन्हें एक नई उम्मीद दी है। यदि सरकार और कृषि विभाग मिलकर विपणन और ट्रांसपोर्टेशन के साधनों को बेहतर करें, तो यह फसल भविष्य में किसानों के लिए स्थायी आर्थिक लाभ का जरिया बन सकती है।

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