तीर्थंन घाटी में किसानों के लिए मधुमक्खी पालन और जड़ी-बूटी खेती पर विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला
तीर्थंन घाटी में किसानों के लिए मधुमक्खी पालन और जड़ी-बूटी खेती पर विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला

Author : Prem Sagar

March 14, 2026 11:13 a.m. 166

प्रदेश की प्रसिद्ध सामाजिक संस्था सहारा के सहयोग से तीर्थंन घाटी के नागीनी में जी. बी. पंत संस्थान द्वारा किसानों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मधुमक्खी पालन और औषधीय जड़ी-बूटियों की खेती से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना था।

कार्यक्रम में घाटी के कई किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत गायिका शाईना ठाकुर और लोक गायक राकेश शर्मा द्वारा सहारा संदेश गीत से की गई।

जी. बी. पंत संस्थान से आए वैज्ञानिक डॉ. किशोर कुमार ने किसानों को मधुमक्खी पालन की आधुनिक तकनीकों, शहद उत्पादन और इसके आर्थिक लाभों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन पहाड़ी किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक अच्छा माध्यम बन सकता है।

कार्यशाला के दौरान किसानों को दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटी कुंठ के बीज भी वितरित किए गए। ग्राम पंचायत श्रीकोट, पलाच्, गहीधार, कलवारी, शरची और नोहाँडा सहित कई क्षेत्रों से आए किसानों को ये बीज दिए गए ताकि औषधीय खेती को बढ़ावा मिल सके।

इस अवसर पर सहारा संस्था के निदेशक राजेंद्र चौहान, पूर्व प्रधान एवं सहारा बोर्ड सदस्य हरी सिंह ठाकुर, खेम ठाकुर, लोक गायक राकेश शर्मा और शाईना ठाकुर उपस्थित रहे।

राजेंद्र चौहान ने कहा कि किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी और मधुमक्खी पालन को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बताया कि सहारा संस्था भविष्य में भी किसानों के लिए ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी।

कार्यक्रम को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए नौ क्लस्टर बनाए गए, जिनमें प्रत्येक क्लस्टर में दस किसानों को जोड़ा गया। इनमें शरची, धारागाड़, गहीधार देहुरी, शहजहु, शैरेड़ा, जगाला, खाबल और रैला क्षेत्रों के किसान शामिल थे। इनमें से चार क्लस्टर महिला किसानों के लिए बनाए गए।

कार्यशाला में किसानों को जड़ी-बूटियों की वैज्ञानिक खेती, बाजार की संभावनाओं और स्वरोजगार के अवसरों के बारे में भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रमों से आने वाले समय में तीर्थंन घाटी मधुमक्खी पालन और औषधीय खेती का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकती है।

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