मुख्यमंत्री की माताजी ने पिंक बूथ पर किया मतदान, लोकतंत्र में भागीदारी का दिया संदेश
मुख्यमंत्री की माताजी ने पिंक बूथ पर किया मतदान, लोकतंत्र में भागीदारी का दिया संदेश

Author : Rajneesh Kapil Hamirpur

May 30, 2026 1:12 p.m. 122

हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों के दौरान लोकतंत्र के प्रति लोगों का उत्साह लगातार देखने को मिल रहा है। युवा मतदाताओं से लेकर बुजुर्ग नागरिकों तक सभी अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। इसी कड़ी में प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की माताजी श्रीमती संसारदेई ने भी अपने मतदान अधिकार का प्रयोग कर लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई। उनकी मतदान प्रक्रिया में भागीदारी ने न केवल स्थानीय लोगों को प्रेरित किया, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक की भूमिका को भी उजागर किया।

करीब 88 वर्ष की आयु में भी श्रीमती संसारदेई मतदान केंद्र पहुंचीं और अपने मताधिकार का प्रयोग किया। उन्होंने ग्राम पंचायत अमलैहड़ के मतदान केंद्र भवड़ां में मतदान किया। इस दौरान मतदान केंद्र पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनका स्वागत किया तथा मतदान प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न करवाया। उम्र के इस पड़ाव में भी मतदान के प्रति उनका उत्साह और जागरूकता लोकतंत्र की मजबूती का एक सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है।

विशेष बात यह रही कि जिस मतदान केंद्र पर उन्होंने मतदान किया, उसे पिंक बूथ के रूप में विकसित किया गया था। चुनाव आयोग द्वारा महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस विशेष बूथ की व्यवस्था की गई थी। पिंक बूथ को आकर्षक तरीके से सजाया गया था और यहां महिला मतदाताओं के लिए विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई गई थीं।

इस मतदान केंद्र की सबसे खास बात यह रही कि यहां पूरी मतदान प्रक्रिया महिलाओं के हाथों में थी। बूथ पर पीठासीन अधिकारी से लेकर मतदान अधिकारी और सुरक्षा कर्मियों तक सभी पदों पर महिला कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। इससे महिलाओं की प्रशासनिक क्षमता और जिम्मेदारी निभाने की भूमिका को भी प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया गया।

पिंक बूथ की अवधारणा का उद्देश्य केवल मतदान केंद्र को विशेष रूप देना नहीं है, बल्कि महिलाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अधिक सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना भी है। ऐसे बूथ यह संदेश देते हैं कि महिलाएं समाज और प्रशासन के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण है।

मतदान केंद्र पर पहुंचे स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना की। कई मतदाताओं ने कहा कि महिलाओं द्वारा संचालित मतदान केंद्र एक सकारात्मक संदेश देता है और इससे समाज में महिला सशक्तिकरण की भावना को बल मिलता है। लोगों ने चुनाव आयोग की इस पहल को सराहनीय बताया।

श्रीमती संसारदेई के मतदान केंद्र पहुंचने से वहां मौजूद मतदाताओं में भी उत्साह का माहौल देखने को मिला। कई लोगों ने कहा कि 88 वर्ष की आयु में मतदान के प्रति उनका समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणा है। लोकतंत्र में हर वोट की अहमियत होती है और बुजुर्ग मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि मतदान केवल अधिकार ही नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है।

प्रदेशभर में पंचायती राज चुनावों के दौरान मतदान केंद्रों पर लोगों की अच्छी भागीदारी देखने को मिली। विभिन्न क्षेत्रों में मतदाता सुबह से ही मतदान केंद्रों पर पहुंचने लगे थे। चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक प्रबंध किए गए थे।

राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतंत्र की सफलता तभी संभव है जब समाज का हर वर्ग चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले। मुख्यमंत्री की माताजी द्वारा मतदान करना इसी सोच को मजबूत करता है। यह संदेश देता है कि उम्र चाहे कितनी भी हो, लोकतांत्रिक अधिकारों और कर्तव्यों का निर्वहन हमेशा प्राथमिकता होनी चाहिए।

ग्राम पंचायत अमलैहड़ के भवड़ां मतदान केंद्र पर हुआ यह मतदान केवल एक सामान्य प्रक्रिया नहीं था, बल्कि लोकतंत्र, महिला सशक्तिकरण और नागरिक जिम्मेदारी का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी बन गया। श्रीमती संसारदेई की सक्रिय भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र की मजबूती प्रत्येक नागरिक की जागरूकता और सहभागिता पर निर्भर करती है। उनके इस कदम ने युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों सहित सभी मतदाताओं को मतदान के महत्व का संदेश दिया है।

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